भारतीय संविधान व अन्नदाता की अनदेखी भाजपा सरकार को पडेगी भारी : कांता आलडियां

रोहतक, 26 नवंबर। मिशन एकता समिति की प्रदेशाध्यक्ष कांता आलडियां ने कहा कि केन्द्र व प्रदेश की भाजपा सरकार सता के नशे में चूर है और भारतीय संविधान व अन्नदाता की अनदेखी सरकार को भारी पड़ेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि तानाशाही से शासन व प्रशासन नहीं चलता है। यह बात उन्होंने बुधवार को संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने के बाद पत्रकारो से बातचीत करते हुए कही। कांता आलडिय़ा ने कहा कि संविधान लोगों के हित के लिए लिखा गया था, लेकिन भाजपा सरकार संविधान को बदलने का प्रयास कर रही है। भाजपा काले कानून लागू कर देश को पुंजीपतियों के हवाले कर रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में केन्द्र सरकार द्वारा कृषि संबंधित तीन बिल पूरी तरह से काले कानून है, जिसका देश व प्रदेश में अन्नदाता विरोध कर रहे है। सरकार किसानों की बात सुनने को तैयार नहीं है और उन पर लाठियां बरसा रही है, जोकि बेहद दुर्भाग्य पूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रजातंत्र में सबको शांतिपूर्ण तरीक्के से अपनी बात रखने का अधिकार है और अन्नदाता भी बिल्कुल शांतिपूर्ण तरीक्के से कृषि बिलो का विरोध कर रहे है, लेकिन सरकार तानाशाही रवैया अपना किसानों की आवाज को दबाना चाहती है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जिस भी सरकार ने अन्नदाता पर अत्याचार किया है, वह सता से बाहर हुई है और अब भाजपा सरकार की भी उल्टी गिनती शुरू हो गई है। कांता आलडिय़ा ने कहा कि भाजपा ने जनहित में फैसले लेने की बजाए जनविरोधी फैसले लिए है, जिसका आज हर स्तर पर विरोध किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को भी कटघरे में खड़ा किया और कहा कि अधिकारी सरकार की कठपुतली बन कर रह गए है। उन्होंने कहा कि जिस संविधान की बदौलत आज वह उच्च पदो पर विराजमान है, वहीं अधिकारी संविधान की धज्जियां उड़ा रहे है, जोकि किसी कीमत पर भी बर्दाशत नहीं किया जाएगा।

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