HARYANA पंचायत चुनाव को लेकर कही सरकार जानबूझकर तो पेंच नहीं फँसा रही है ?

अलख हरियाणा || गाँव की सरकार आखिर कब बनेगी ? हरियाणा में सबको इस सवाल के जवाब का इन्तजार काफी दिनों से किया जा रहा है। पहले कोरोना महामारी के नाम पर पंचायती चुनाव को स्थगित कर दिया, स्थिति सामान्य हुई तो बीसी -ए वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान का नोटिफेक्सन जारी कर दिया गया। सरकार के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई और जिसकी अगली सुनवाई 11 अक्तूबर 2021 को होनी है।
बीती 15 अप्रैल को अधिसूचित हरियाणा पंचायती राज द्वितीय संशोधन अधिनियम 2020 को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता का तर्क है कि पंचायती राज मे 8 % सीटें बीसी -ए वर्ग के लिए आरक्षित की गई है और यह तय किया गया है कि एक ज़िले में न्यूनतम सीटें 2 से कम नहीं होनी चाहिए याचिकाओं के अनुसार यह दोनों बातें एक दूसरे के विपरीत है 8 % के लिए केवल 6 ज़िले हरियाणा में ऐसे है जंहा 2 सीटें आरक्षण के लिए निकलती हैं। बाक़ी बचे 18 ज़िलों में एक सीट आरक्षित की जानी है। पिछली सुनवाई के दौरान माननीय हाईकोर्ट ने सरकार से कहा था कि वो चाहे तो आरक्षण के लिए नए प्रावधान को निलंबित करके पुराने नियमों पर चुनाव करवा सकती है लेकिन सरकार नए प्रवाधानों के तहत चुनाव करवाना चाहती है । सरकार द्वारा पंचायती चुनाव से विधानसभा व लोकसभा की राजनीति साधने की क़वायद पंचायत के चुनाव की रोड़ा बनी हुई है और वही 23 फ़रवरी को कार्यकाल ख़त्म होने से ज़िला परिषद, ब्लाक समिति व ग्राम पंचायतों की कार्यवाही ठप्प होने से स्थानीय विकास व जनमानस को नुक़सान उठाना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि कार्यपालिका के तीन स्तरीय ढाँचे में से स्थानीय निकाय सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं। जिन विकास कार्यों की रूपरेखा व देखरेख की ज़िम्मेदारी जिलापरिषद , पंचायत समिति व ग्राम पंचायत को करनी होती है वो सुचारू रूप से नहीं हो रही हैं। ऐसे में सबको इंतज़ार इन चुनाव का है। चर्चा ये भी है सूबे की मनोहर सरकार फिलहाल ये चुनाव करवाने की मूढ में नहीं हैं। किसान आंदोलन के चलते अगर ये चुनाव हो भी जाते हैं तो सरकार को डर की गाँव में उनकी कमजोर स्थिति जगजाहिर हो जाएगी। सो जान बूझकर चुनाव को टालने के अलग अलग रास्ते तलाश रही है। ( लेखक _डॉ जोगिंद्र मोर )

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