यूपी चुनाव से पहले बदल दिए जाएंगे हरियाणा के “मुख्यमंत्री” ?

अलख हरियाणा डॉट कॉम || डॉ अनुज नरवाल रोहतकी || पंजाब सूबे में अचानक आये सियासी जलजले में कैप्टेन अमरिंदर सिंह का किला ढह गया है। इससे पहले इस तरह का सियासी भूकंप कर्नाटक, उत्तराखंड और गुजरात में देखने को मिल चुके हैं। पंजाब को छोड़ इस सभी सूबों में यूं तो बीजेपी सरकारें हैं लेकिन इन सूबों की एक बात कॉमन है कि अगले साल यहाँ विधानसभा चुनाव होने हैं। यूपी वाले सीए को भी हटाने का अंदरूनी प्रयास हो चुका है लेकिन वहां कामयाबी हासिल नहीं हो सकी। इसी बीच एक चर्चा हरियाणा में सत्ता नेतृत्व परिवर्तन की चलने लगी है। हाल ही सीएम खट्टर का पीएम मोदी दरबार पेश होने के बाद ये चर्चाएं जोर पकड़ने लगी हैं।

क्यों बदल जा सकते हैं हरियाणा में “मुख्यमंत्री”
इस बात में कोई संदेश नहीं है हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, प्रधानमंत्री मोदी के “यस मैन” हैं बावजूद इसके किसान आंदोलन को लेकर बीजेपी की शीर्ष नेतृत्व मनोहर लाल से खासा नाराज है। ऊपर से उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव, जिसमें किसान आंदोलन की वजह लगभग बीजेपी को हार का डर सता रहा है। इसके अलावा कई पार्टी स्तर की दिक्क़ते सो अलग। सियासी जानकारों का मानना है कि यूपी चुनाव में अगर बीजेपी चाहती है कि वो वहां से जीते तो उनको किसान आंदोलन की मांगों मानने के अलावा हरियाणा में मनोहर लाल को सीएम पद से हटाने का फैसला करना ही होगा। हरियाणा में किसानों पर बार बार लाठीचार्ज करवाने को लेकर मनोहर लाल से अच्छे खासे नाराज है। अगर मनोहर लाल को हटाकर किसी दूसरे चेहरे को सीएम पद पर बीजेपी बिठाती है तो यूपी और पंजाब चुनाव में बीजेपी को सीधा फायदा मिल सकता है। हालांकि अभी यह चर्चा ही है लेकिन सियासत और क्रिकेट में खेल कभी बन सकता है और बिगड़ सकता है। इसके लिए थोड़ा सा इन्तजार करना होगा।

मनोहर लाल की जगह कौन ले सकता है ?
हरियाणा में बीजेपी गैरजाट राजनीती करती रही है। जिसके चलते अगर हरियाणा में सत्ता नेतृत्व में बदलाव होता है तो जाट सीएम को बनाया जाए इसकी कम ही उम्मीदे लग रही हैं लेकिन नॉन जाट चेहरे पर मोहर लग सकती है। ये बीजेपी को सूट भी करेगा। जाट चेहरों में खासतौर से सुभाष बराला, ओपी धनखड़ और कैप्टन अभिमन्यु ही है जो विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार गए थे। बीजेपी के इन जाट चेहरों को हरियाणा का जाट वोटर कम पसंद करता है, ऊपर से हारे हुए हैं। ऐसे इनके नाम पर मोहर लगाकर उपचुनाव में बीजेपी जाना नहीं चाहेगी। अब नॉन जाट चेहरों की बात करते हैं। उसमें बीजेपी के पास हाल के गृह मंत्री अनिल विज और विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता हैं। दोनों पुराने सियासी लोग है हाल में विधानसभा में है और सरकार में अहम जिम्मेदारी वाले पद पर हैं। वहीं एक चर्चा यह भी कि बीसी बी गुर्जर या यादव में से मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है ऐसे हालात में इनके नाम पर विचार किया जा सकता है।

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