रोजगार देने में गठबंधन सरकार विफल, बेरोजगारी दर में पहला पायदान : किरण चौधरी

भिवानी/चरखी दादरी,अलख हरियाणा डॉट कॉम। पूर्व मंत्री एवं तोशाम विधानसभा से कांग्रेस विधायक किरण चौधरी ने प्रदेश में बढ़ रही बेरोजगारी की दर पर चिंता व्यक्त करते हुए गठबंधन सरकार की नीतियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हरियाणा बेरोजगारी में सबसे अव्वल स्थान पर है, इससे स्पष्ट होता है कि सरकार का युवाओं को 75 फीसद नौकरी देने की घोषणा कागजों में ही सिमट गई है।

सीएमआईई सर्वेक्षण के मुताबिक अगस्त माह में हरियाणा में बेरोजगारी दर 35.7 फीसद है, मगर हैरानी की बात यह है कि गठबंधन सरकार इससे मानने को तैयार नहीं है। केंद्र सरकार ने लेबर ब्यूरो द्वारा ऐसे सर्वेक्षणों को रोक दिया और सीएमआईई इस क्षेत्र में लगी एक प्रतिष्ठित संस्था है।
किरण चौधरी ने कहा कि सीएमआईई सर्वेक्षण रिपोर्ट का खंडन पर सरकार को कटघरे में खड़े हुए एनएफएसओ के आंकड़ों पर भी सवाल उठाया है। सीएमआईई ने अपने सर्वेक्षण अगस्त 2021 में 5874 सैंपल (सर्वे में शामिल लोग) लिए हैं, जबकि एनएसएसओ के आंकड़े इससे पूरी तरह उल्ट हैं, उन्होंने 2607 सैंपल लिए हैं, जोकि ये आंकड़े 2019-20 के हैं, इतने कम लोगों को सर्वे में शामिल करके बेरोजगारी का आंकलन सही तरीके से नहीं किया जा सकता है। वहीं उन्होंने सरकार के उस ब्यान को भी हास्यपद बताया, जिसमें कहा गया है कि कोई भी बेरोजगार व्यक्ति नहीं है, जो मेट्रिक पास नहीं है। लाखों ड्रापआउट हैं, जो बेरोजगार हैं।
किरण चौधरी ने भर्तियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं,  अभी तक, पुलिस कांस्टेबल, क्लर्क, कांस्टेबल और नायब तहसीलदार से लेकर 28 भर्तियां रद्द की गई हैं, जिनके पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। 470000 ग्रुप सी और डी पदों के लिए सीईटी की अंतिम तिथि 4 बार बढ़ाई गई है।

जींद उपचुनाव के पास ग्रुप डी स्पोट्र्स कोटे की भर्तियां हुई थी- अब नीति में अचानक हुए बदलाव से ज्यादातर चुनिंदा लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। अभी हाल ही में आयोजित महिला पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के सेंटर 200 से 300 किलोमीटर की दूरी पर थी, जिससे उन्हें परेशानी झेलने के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।
किरण चौधरी ने सरकार की पर्ची व खर्ची के बिना भर्ती पर सवाल उठाते हुए कहा कि हरियाणा सरकार ने 30000 से अधिक लोगों को अनुबंध पर तैनात किया है। सरकारी विभागों में लाखों नियमित पद खाली पड़े हैं, तो आउटसोर्सिंग के माध्यम से ऐसी तैनाती करने का कोई तुक या कारण नहीं है।

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