राज्यसभा के रास्ते मोदी सरकार में कृषि मंत्री बन सकते हैं अमरिंदर !

चंडीगढ़। पंजाब के मुखयमंत्री की कुर्सी छोड़ने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बुधवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। शाह के आवास पर यह बैठक करीब 45 मिनट चली। बैठक के बारे में ब्योरा नहीं मिल सका है। हालांकि अब चर्चा है कि कोई बड़ा कांग्रेसी नेता भाजपा में शामिल हो सकता है।

इसे कैप्टन से जोड़कर देखा जा रहा है। कैप्टन मंगलवार को दिल्ली पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने किसी राजनीतिक व्यक्ति से मुलाकात से इनकार किया था। फिर भी अब वह शाह से मिलने गए हैं। चर्चा है कि अमरिंदर को भाजपा राज्यसभा के रास्ते सरकार में भी ला सकती है और उन्हें कृषि मंत्री बनाया जा सकता है। वहीं पंजाब में जारी सियासी उठापटक के बीच यह भी चर्चा है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह 2 अक्टूबर को मास्टरस्ट्रोक खेल सकते हैं।

वे एक गैर राजनीतिक संगठन बनाकर पंजाब की सियासत में नया दांव ठोकेंगे। कैप्टन के करीबी लोगों की मानें तो यह संगठन किसान आंदोलन को खत्म करवा देगा। उसके बाद पंजाब में नए सियासी दल का आगाज होगा।

पंजाब में कांग्रेस नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे के बाद उलझी हुई है। ऐसे में कैप्टन की इस मुलाकात ने पंजाब में सियासी गर्माहट को और बढ़ा दिया है। कैप्टन का दिल्ली दौरा पंजाब की सियासत के मायने से काफी अहम है। कैप्टन को अपमानित होकर CM की कुर्सी छोड़नी पड़ी। कैप्टन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नजदीकियां जगजाहिर हैं। हालांकि इस मुलाकात के सीधे सियासी मायने लगाए जा रहे हैं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह की अमित शाह से मुलाकात के बाद अब कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब कृषि सुधार कानून कैप्टन के लिए बड़ा टास्क हो सकता है। कैप्टन अब कानून को लेकर आंदोलनकारी किसानों से मिल सकते हैं। इसे केंद्र सरकार और संयुक्त किसान मोर्चा के बीच मध्यस्थता से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

हालाँकि कैप्टन शुरू से ही किसान आंदोलन के समर्थन में रहे हैं। पंजाब में आंदोलन करीब एक महीने तक शांतिपूर्ण ढंग से चलता रहा। इसके बाद किसान दिल्ली गए तो कैप्टन ने कोई रोक-टोक नहीं की। यहां तक कि उन्होंने केंद्र सरकार के किसानों को रोकने के निर्देश को भी ठुकरा दिया। किसानों के साथ कैप्टन के रिश्ते भी अच्छे हैं।

भाजपा को बता चुके हैं विकल्प

कैप्टन के पंजाब के मुख़्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सबसे बड़ा सवाल था कि उनका सियासी भविष्य क्या होगा? कैप्टन से सीधे तौर पर भाजपा में शामिल होने के बारे में भी पूछा गया। उन्होंने कहा कि सब विकल्प खुले हैं। वह इसके बारे में सोच रहे हैं। इससे पहले 2017 में कैप्टन का कांग्रेस हाईकमान से टकराव हुआ था। तब कैप्टन ने जाट महासभा बनाकर कांग्रेस काे चुनौती दी थी। कैप्टन ने बाद में इसका खुलासा किया था कि वो भाजपा में जाने का मन बना चुके थे।

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