अकेले सरकार के बस का रोग नहीं है-जनता नहीं मानी तो फिर सब कुछ है ‘कोरोना’भरोसे


  Dr.Anuj Narwal Rohtaki
  24 Mar 2020

हरियाणा वालो को हर चीज मजाक में लेने की आदत भले ही हो लेकिन कोरोना को लेकर मजाक भारी पड़ सकता है। खतरा दुनिया पर मडरा रहा है। कोरोना की वजह से मृत्यु दर दिन-ब-दिन बढ रही है। खबर लिखे जाने तक दुनिया में कोरोना वायरस की चपेट में आने वाले कुल लोगों में से 15 फीसदी लोग मर चुके हैं। हरियाणा सरकार अपने स्तर पर जुटी है। हरियाणा के मुखिया मनोहर लाल के अनुसार हरियाणा में  अब तक 14 मामले कोरोना पोजिटिव  मिले हैं। तमाम अस्पतालों में 370 आईसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं जिसमें 3177 रोगियों के लिए व्यवस्था है। 10959 सदिंग्ध लोगों को क्वारंटाइन के लिए 2544 कमरे और कोरिडोर बनाए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के हिसाब से हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के पास  केवल 190 वेंटीलेटर ही है। 210 वेंटीलेटर और  खरीदने का फैसला सरकार ने लिया है। हम आपको ये आंकड़े बता कर डराने की नहीं बल्कि वक्त रहते आपको समाझने की कोशिश कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट  के  हिसाब से पिछले कुछ दिनों में विदेश से लगभग 7000 लोग हरियाणा लौटे हैं। हरियाणा के लिए ये सबसे बड़ी चिंता का कारण  भी यही है।
 

सिर्फ सरकारी मशनिरी के बस को रोग नहीं है कोरोना
दुनिया में आई महामारी का भले कोई इलाज अब तक संभंव न हो पाया हो लेकिन  इस कोरोना वायरस से कैसे बचना है इस बात का दुनिया को  पता लग चुका है। सरकारी आदेशों को मानते हुई जनता को खुद ही अपने विवेक से घर में रहने की जरूरत है। कोरोना  से बचना है तो हमें घर में रहकर एतिहात बरतने की जरूरत है। 


विदेश से लौटकर आए लोगों से अलख हरियाणा की अपील
मीडिया रिपोर्ट के हिसाब  से लगभग 7000 लोग विदेशों से लौटे हैं। ज्यादातर घर पर हैं। उन लोगों से अलख हरियाणा की  अपील है कि वे अपनी जिम्मेदारी समझते हुए टेस्ट प्रक्रिया में शामिल हों ताकि इस वायरस से खुद के साथ अपने  आस पास के लोगों को इसकी चपेट में आने से बचा सकें।
देश की स्थिती
कोरोना वायरस संकट के मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कुछ आंकड़ें जारी किए हैं, जिनके अनुसार देश में 84,000 लोगों पर एक आइसोलेशन बेड और 36,000 लोगों पर एक क्वारंटाइन बेड है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ये आंकड़ें 17 मार्च तक के हैं.आंकड़ों के मुताबिक, स्थिति इतनी गंभीर है कि प्रति 11,600 भारतीयों पर एक डॉक्टर और 1,826 भारतीयों के लिए अस्पताल में एक ही बेड है.सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में 1,154,686 पंजीकृत एलोपैथिक डॉक्टर और सरकारी अस्पतालों में 7,39,024 बेड हैं


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