किसान नहीं दे रही किसानो की सरसों और गेहूं की पैसे || किसानों के लिए दूंगा धरना || अभय सिंह चौटाला


  alakh haryana
  01 Jul 2020

इनेलो नेता चौधरी अभय सिंह चौटाला सोमवार ने यहां पे्रसवार्ता के दौरान बताया कि सरकार ने अब तक मात्र 75 लाख मीट्रिक टन गेहूं ही खरीदी है जबकि गत वर्ष यह आंकड़ा 95 लाख मीट्रिक टन था। इसलिए पिछले साल के मुकाबले में सरकार की गेहूं की खरीद कम की गई है। सरकार का वादा था कि किसानों को 72 घंटे के अंदर सरसों व गेहूं की खरीद की अदायगी की जाएगी जबकि 60 प्रतिशत से ज्यादा किसान कम से कम 20-25 दिनों से गेहूं की अदायगी के लिए कभी आढ़ती के पास, कभी सरकारी खरीद एजेंसी के कार्यालयों में चक्कर काट रहे हैं। सूत्रों के अनुसार अब तक लगभग 16 हजार करोड़ रुपए के कुल भुगतान के विरुद्ध केवल 1600 करोड़ रुपए ही किसानों को उनका भुगतान किया गया है अर्थात् प्रदेश के 16 लाख किसानों को मात्र चार फीसदी गेहूं की खरीद का ही भुगतान किया गया है। सरकार का कहना है कि जब गेहूं गोदामों में पहुंच जाएगी तभी बकाया रकम किसानों को दी जाएगी जबकि खरीद करने के पश्चात मंडी बोर्ड के नियमों के अनुसार 24 घंटे के अंदर खरीददार को गेहूं की अदायगी करनी अनिवार्य होती है। सरकार ने किसानों को बोनस तो क्या देना था, उनकी गेहूं की खरीद का पैसा ही देने से सरकार आनाकानी कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरसों की फसल का अब तक 2900 करोड़ रुपए दिया गया है जबकि किसानों का लगभग 3600 करोड़  रुपए का भुुगतान बनता है, भी 700 करोड़ रुपए की राशि अभी बकाया है। सरकार चने की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद इसलिए नहीं कर रही कि इसका दाना छोटा है जबकि लगभग सभी किसानों ने जो बीज सरकार की तरफ से दिया गया उसी से ये फसल पककर तैयार हुई है। चने के दाने का साइज छोटा बताकर खरीद न करना किसानों को बेवजह परेशान किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि उठान के नाम पर खरीद एजेंसी के ठेकेदार प्रति कट्टा पांच रुपए अतिरिक्त मांग कर रहे हैं जो व्यापारी सुविधा शुल्क दे देता है उसकी गेहूं उठाकर गोदाम में लगा दी जाती है। इस तरह सरकारी ठेकेदार ने खरीद एजेंसी अधिकारियों से मिलकर कम से कम 800 करोड़ रुपए का घोटाला किया है जिसकी जांच होनी अतिआवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिन बैंकों में किसानों को खाते खुलवाने की शर्त रखी है, उनमें भी सरकारी एजेंटो ने खूब लूट मचा रखी है अर्थात् किसानों को समय पर फसलों के भाव नहीं दिए जा रहे हैं और ये एजेंट महीनों उनकी राशि पर ही ब्याज खा रहे हैं। इस दौरान पार्टी प्रदेशाध्यक्ष नफेसिंह राठी भी उपस्थित थे।
इनेलो नेता ने कहा कि सरकार की कुनीतियों के चलते इस बार प्रदेश में पिछले वर्ष के मुकाबले 20 लाख मीट्रिक टन गेहूं कम पैदा हुआ है जिसकी पूर्ति करने के लिए सरकार में बैठे लोग अपने एजेंटों से उत्तर प्रदेश और राजस्थान से गेहूं मंगवा रही है। ये सरकारी एजेंट प्रति क्विंटल के हिसाब से लगभग 200-300 रुपए मुनाफा कमा रहे हैं। एक तरह से देखा जाए तो ये जो 20 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने वाला मामला है ये मात्र किसानों को लूटने का जरिया ही है।
उन्होंने कहा कि किसान को यूं चारों तरफ से लूटा जा रहा है जैसे सरकारी एजेंट गेहूं की गुणवत्ता की जांच के बहाने फरसी के इस्तेमाल से करीब 100-150 ग्राम गेहूं निकालकर लूट मचाई जा रही है। विडंबना ये भी है कि क्या मुख्यमंत्री महोदय को इस बात की जानकारी नहीं है, अगर नहीं है तो मुख्यमंत्री को तुरंत इस पर संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि आज तक भी प्रदेश के करीब 20 हजार किसानों से सरसों की खरीद भी सरकार ने नहीं की है। दुर्भाग्य की बात ये है कि उत्तर प्रदेश और राजस्थान में सरसों की खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं है जबकि हमारे प्रदेश के किसानों के लिए ये अनिवार्य है, इसलिए सरसों से जुड़े किसान आज तक भी सरकार की अनदेखी से प्रताडि़त हैं।
इसलिए इनेलो नेता ने कहा कि वह 2 जून को सिरसा में किसानों को साथ लेकर धरने पर बैठेंगे और सरकार को बाध्य करेंगे और जब तक भुगतान नहीं किया जाएगा। उन्होंने सरकार के पहले ‘अनलॉक’ पर जवाब देते हुए कहा कि अगर सरकार लॉकडाउन शुरू करने से पहले देशभर के मजदूर जो अपने-अपने घर जाना चाहते थे, उन्हें घर भिजवाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से इंतजाम करती तो उनकी इस प्रकार बुरी गत न होती।

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