जन्मदिन विशेष - अटल जैसी शख्सियत देश के इतिहास में गिनी चुनी ही मिलेगी


  alakh haryana
  25 Dec 2017

आज भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन है। 25 दिसंबर 1924 में जन्में अटल बिहारी राजनीति में नहीं आना चाहते थे वे पत्रकार बनकर जीवन बिताना चाहते थे लेकिन नियती को कुछ ओर मंजूर था वे देश के 3 बार प्रधानमंत्री बने। वे अच्छे वक्ता, पत्रकार , कवि और राजनेता रहे। 93 बसंत देखने वाले अटल बिहारी आज उम्रदराज होने के चलते कुछ लिखने, बोलने, सोचने  और समझने असहाय महसूस करते हैं।  

 

25 दिसंबर 1924 मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जन्में अटल बिहारी वाजपयी राजनीति में स्नातकोतर होने के बाद भी राजनीति में नहीं आना चाहते थे वे पत्रकार बनना चाहते थे। लेकिन वक्त को कुछ ओर ही मजंूर था। 1942 में देश की आजादी के जेल गए अटल ने 1951 में जनसंघ स्थापना में अहम भूमिका निभाई। वे पहल बार 1957 में लोकसभा के लिए चुने गए। इसके बाद उनका राजनीति पारी शुरू हो गए। वे लोकसभा और राज्यसभा के लिए कई दफा चुने गए। देश के विदेशमंत्री जैसे पद को उन्होंने सुशोभित किया। देश में लगी ऐमजैनी के दौरान 1975 से 77 तक जेल में रहे। अटल बिहारी वाजपेयी पहली दफा 16 मई 1996 में प्रधानमंत्री बने लेकिन 13 पार्टी के पूर्ण बहुमत की स्थिती न होने के चलते 13 दिन तक प्रधानमंत्री रहे। इसके बाद मध्यवर्ती चुनाव में गठबंधन की सरकार बनी तो अटल देश के दूसरी बार प्रधानमंत्री बने लेकिल सरकार को पूरा समर्थन नहीं मिला इस बार अटल 13 महीने तक प्रधानमंत्री बने। इस दौरान 11 मई 13 मई 1998 में अटल बिहारी ने विश्व का ध्यान भारत की खिचा। मई 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण करवाया। पश्चिमी देश ने भारत पर प्रतिबंध लगाने के दबाव को न मानते हुए अटल ने देश को नया नारा दिया-जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान। इसके साथ-साथ अटल ने भारत-पाक के बीच अमन को बढाने का प्रयास किए 20 फरवरी 1999 में सदा-ए-सरहद बस में बैठकर वे पाकिस्तान पहुंचे । इस बस सेवा को  दोनों मुल्कों बीच शुरू कर दिया गया। अप्रैल 1999 जयललीता ने एनडीए से समर्थन वापिस ले लिया। अटल देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहे मई में पाकिस्तान ने कारगिल युद्ध कर दिया जिसके बाद लोकसभा चुनाव में एनडीए पूर्ण बहुमत मं आने के बाद 13 अक्टूबर 1999 में वे तीसरी बार प्रधानमंत्री बने और 5 साल तक देश को चलाया। प्रधानमंत्री बने कुछ ही वक्त बिता था कि 24 दिसंबर 1999 को नेपाल से आई सी-814 को आतंवादियों ने अपहरण कर लिया । उनकी गिरफत से लोगों को बचाने के लिए अटल सरकार ने मौलाना मसूद अजहर को छोड़ना पड़ा। सब बातों को भूल अटल ने पाकिस्तानी राष्ट्र्पति परवेज मुशरफ को आगरा शिखर वार्ता के लिए बुलाया लेकिन ये भी असफल रही। 13 दिसंबर 2001 में संसद पर आतंकी हमला होने के बाद भी अटल ने धैर्य रखा । 2004 में एनडीए ने इण्डिया सायनिंग का नारा दिया लेकिन जनता उन्हें नकार दिया।

 

अटल बिहारी अच्छे राजनेता के साथ साथ अच्छे वक्ता भी रहे। लेकिन अटल कहते है उनसे कहीं अच्छे उनके पिता और उनके दादा वक्ता थे। अटल बिहारी वाजपेयी बेहतर कही भी है। अलट बिहारी वाजपेयी की मेरी 51 कविताएं नामक किताब में उनकी कविताओं को पढा जा सकता है। उनकी कुछ कविताओं को जगजीत सिंह की आवाज भी मिली। संवेदना नामक एलबंम में इसे सुना जा सकता है। वे खुद भी अपनी कविताओं बेतर तरीके पेश करने की माहरथ रखते है। अटल जैसी शख्सियत देश के इतिहास में गिनी चुनी ही मिलेगी
अटल बिहारी की मशहूर १० कविताये सुने और देखे नीचे वीडियो में 


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