नांधा के आदर्श स्कूल में शहीद उद्यम सिंह की जंयती मनाई


  Shiv Yogi kanhra
  26 Dec 2020



नांधा गांव के आदर्श सीनीयर सकैंडरी स्कूल में शहीद उद्यमसिंह की जयन्ती को एक पर्व के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर निदेशक कुलदीप सांगवान, प्रधानाचार्य मंदीप कादयान व प्रेजीडेन्ट मांगे राम आदि ने शहीद उद्यम सिंह के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी तथा उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शहीद उधम सिंह का जन्म 26 दिसम्बर 1899 को पंजाब के संगरूर जिले के सुनाम गांव में हुआ। सन 1901 में उधमसिंह की माता और 1907 में उनके पिता का निधन हो गया। शहीद उधमसिंह 13 अप्रैल 1919 को घटित जालियांवाला बाग नरसंहार के प्रत्यक्षदर्शी थे। राजनीतिक कारणों से जलियांवाला बाग में मारे गए लोगों की सही संख्या कभी सामने नहीं आ पाई। इस घटना से वीर उधमसिंह तिलमिला गए और उन्होंने जलियांवाला बाग की मिट्टी हाथ में लेकर माइकल ओ डायर को सबक सिखाने की प्रतिज्ञा ले ली। अपने मिशन को अंजाम देने के लिए उधम सिंह ने विभिन्न नामों से अफ्रीका, नैरोबी, ब्राजील और अमेरिका की यात्रा की। जलियांवाला बाग हत्याकांड के 21 साल बाद 13 मार्च 1940 को रायल सेंट्रल एशियन सोसायटी की लंदन के काक्सटन हाल में बैठक थी जहां माइकल ओ डायर भी वक्ताओं में से एक था। उधम सिंह उस दिन समय से ही बैठक स्थल पर पहुंच गए। अपनी रिवॉल्वर उन्होंने एक मोटी किताब में छिपा ली। इसके लिए उन्होंने किताब के पृष्ठों को रिवॉल्वर के आकार में उस तरह से काट लिया थाए जिससे डायर की जान लेने वाला हथियार आसानी से छिपाया जा सके। बैठक के बाद दीवार के पीछे से मोर्चा संभालते हुए उधम सिंह ने माइकल ओ डायर पर गोलियां दाग दीं। दो गोलियां माइकल ओ डायर को लगीं जिससे उसकी तत्काल मौत हो गई। उधम सिंह ने वहां से भागने की कोशिश नहीं की और अपनी गिरफ्तारी दे दी। उन पर मुकदमा चला। 4 जून 1940 को उधम सिंह को हत्या का दोषी ठहराया गया और 31 जुलाई 1940 को उन्हें पेंटनविले जेल में फांसी दे दी गई। इस अवसर पर विनोद, विनोद शर्मा, सुनील, रामकुमार, नरेश कुमार, शकुन्तला, सरिता, सुनीता, मेनका, रेखा, सरोज, संजु, ज्योति, उषा आदि मोजूद थे।

 


Vidya Softwares

संबंधित खबरें



0 Comments

एक टिप्पणी छोड़ें

 
5100