जींद में अब तक किस-किस पार्टी के और कौन-कौन बने हैं विधायक


  dr.satish tyagi
  16 Jan 2019


जींद में अब तक किस-किस पार्टी के और कौन-कौन बने हैं विधायक 1952 में हुए पहले चुनाव के समय जिला जींद पेप्सू का हिस्सा था और पेप्सू की अलग विधान सभा थी, जिसके लिए दिसम्बर ,1951 में चुनाव हुए थे . पेप्सू के जींद विधान सभा क्षेत्र से चै. दल सिंह विधायक चुने गए थे. 1954 के पेप्सू चुनाव में भी जींद से  दल सिंह ही विधायक चुने गए. दोनों ही बार वे कांग्रेस प्रत्याशी थे. 1957 के चुनाव में जींद पंजाब सूबे का विधान सभा का क्षेत्र बना . यह दोहरी सीट थी और यहाँ से दो विधायक --इन्दर सिंह ( सामान्य) व भलेराम ( आरक्षित )चुने गए. ये दोनों ही विधायक डॉ आंबेडकर की एस सी ऍफ पार्टी से चुने गए थे और दोनों ही कांग्रेस उम्मीदवारों को पराजित किया.  1962 में यह सीट दोहरी नहीं रही और यहाँ से स्वतंत्र पार्टी के राम सिंह विधायक चुने गए. राम सिंह ने कांग्रेस प्रत्याशी चै. दल सिंह को पराजित किया लेकिन 1967 में चै  दल सिंह विजयी रहे और कैबिनेट रैंक के मंत्री बने .1968  में दल सिंह जींद छोड़कर जुलाना चले गए( वहां  चुनाव हार गए ) तो कांग्रेस ने दयाकिशन  को प्रत्याशी बनाया . उन्होंने निर्दलीय शंकर दास को पराजित किया. 1972 में दल सिंह पुनः जींद से लड़े संगठन कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में, और विजयी रहे . इस बार उन्होंने  इंदिरा कांग्रेस के दयाकिशन को पटखनी दी.ये वही दयाकिशन थे जिन्हें विधान सभा अध्यक्ष बनाने का  मुख्यमंत्री पंडित भगवत दयाल शर्मा का प्रस्ताव विधान सभा में गिर गया था और जो भगवत दयाल की सरकार के पतन का कारण बना .

1977 में जींद की राजनीति में  मांगेराम गुप्ता के रूप में एक नए खिलाड़ी ने छलांग लगायी . गुप्ता ने अपने जीवन का पहला चुनाव निर्दलीय लड़ा और जीता. 1982 में  गुप्ता कांग्रेस के टिकट पर लड़े लेकिन लोकदल के बृजमोहन सिंगला ने उन्हें 146 मतों से पराजित कर दिया. गुप्ता ने मतगणना में धांधली के आरोप लगाते हुए सिंगला कि विजय को अदालत में चुनौती दी. 1986 में सुप्रीम कोर्ट ने गुप्ता को विजयी घोषित किया लेकिन तब तक सिंगला अपने कार्यकाल के चार वर्ष पूरे कर चुके थे.  1987 का चुनाव भी गुप्ता के लिए असफलता ही लाया. इस दफा लोकदल के ही परमानन्द ने उनका विधान सभा पहुँचने का रास्ता रोक दिया लेकिन 1991 में वे जनता पार्टी के टेकराम कंडेला को पटखनी देकर विधायक बन गए.1996 में हरियाणा विकास पार्टी की  ओर से मैदान में कूदे बृजमोहन सिंगला ने एक बार फिर मांगेराम गुप्ता को शिकस्त दे दी. वर्ष 2000 में गुप्ता इनेलो के गुलशन लाल भारद्वाज को पराजित करने में सफल रहे. 2005  में गुप्ता पुनः विजयी रहे . इस बार
उन्होंने इनेलो के सुरेंदर सिंह बरवाला  को मात दी और उनके चिर -प्रतिद्वंदी बृजमोहन सिंगला( निर्दलीय) तीसरे स्थान पर रहे. 2009 में गुप्ता जीतते तो उनकी हैट्रिक होती लेकिन इनेलो के डॉ हरिचंद मिड्डा ने उनका यह सपना पूरा नहीं होने दिया. बृजमोहन सिंगला इस बार कुलदीप बिश्नोई की हरियाणा जनहित कांग्रेस के उम्मीदवार थे और वे तीसरे स्थान पर रहे .2014 में इनेलो के डॉ मिड्डा फिर से विजयी हुए. उन्होंने भाजपा के सुरेंदर सिंह बरवाला को पराजित किया. कांग्रेस के प्रमोद सहवाग तीसरे स्थान पर रहे. सबसे रोचक यह रहा कि पहली दफा बहुजन समाज पार्टी ने यहाँ अपनी प्रभावी उपस्थि दर्ज की . बसपा से चुनाव लड़े युवा नेता सुधीर गौतम ने 13 हजार से भी ज्यादा वोट लेकर सबको चैंका दिया. गौतम ने 2009 में जुलाना से हजकां से चुनाव लड़कर भी दस हजार वोट प्राप्त कर लिए थे .चै. दल सिंह, मांगेराम गुप्ता , बृजमोहन सिंगला  और परमानन्द ने मंत्री पद का भी
सुख भोगा.


Vidya Softwares

संबंधित खबरें



0 Comments

एक टिप्पणी छोड़ें

 
0259