किसान आंदोलन के कितने पास कितने दूर हैं हरियाणा के सियासतदान


  alakh haryana
  28 Nov 2020

कृषि  कानूनों  में बदलाव को लेकर  किसान सड़को  पर हैं।  सर्द मौसम में पानी की बौछारें सहता किसान, हक के लिए प्रशासन से उलझता किसान, हर बाधा  को पार करता हुआ किसान सरकार पर दबाव बनाने की जुगत में है।  लेकिन वो सियासी लोग जिनकी सियासत की बुनियाद ही किसानों पर टिकी हो वो आखिर किसानों के लिए क्या कर रहे हैं?  

हरियाणा सूबे के सियासतदानों की बात करें तो यहाँ सूबे के मुखिया मनोहर लाल हैं और उप मुख्यम्नत्री श्रीमान दुष्यंत चौटाला, ये दोनों ही कृषि कानूनों की तरफदारी करते हुए  किसान आंदोलन की हवा निकालने पर तुले हैं। यानी सरकार आंदोलन के खिलाफ है। और इधर, विपक्ष नाम का प्राणी है कि वर्चुवल यानी दिखावटी विरोध महज  ट्विटर, फेसबुक आदि पर दर्ज करवा रहा है।  कुछ रोज पहले हरियाणा के पूर्व मुख्यनत्री ॐ प्रकाश चौटाला जब किसानों के बीच फंस गए थे, तो उस वक्त भी वे किसानों के हक हकूक में शामिल होने के सवाल पर कैसे कन्नी काट गए थे 


अब बात करते हैं सूबे के नेता प्रतिपक्ष और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की।  हुड्डा साहब कॉन्फ्रेंस, प्रेस नोट, ट्विटर आदि के माध्यम से ही किसानों के साथ होने की बात करते हैं। इतने बड़े आंदोलन में न वे खुद और न ही सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा शामिल हुए। हाँ, अपने दूत के रूप में सोनीपत के विधायक सुरेंद्र पंवार को इस आंदोलन का समर्थन करने के लिए भेज कर फोटो खिचवाने की रस्म जरूर निभा दी है।  
कुल मिलकर न पक्ष और न ही विपक्ष किसानों के साथ कंधे से कन्धा मिलकर चल रहा है। ऐसे में किसान आंदोलन इसी बात पर निर्भर है, कि वो खुद के दम पर कितनी एकता से और कब तक डटे रहेंगे। किसान आंदोलन का अंत केसा होगा इसके लिए इन्तजार करना होगा। आप भी अपनी राय जरूर कमेंट बॉक्स में लिखें।  


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