ये कैसा भारत : सरपंच ने गांव में कराई मुनादी, लड़कियां ना पहने जींस और न रखे फोन


  Alakh Haryana
  16 Apr 2018

एक तरफ तो बेटियां हरियाणा के लिए गौरव बनती जा रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इन बेटियों पर शिकंजा कसते जा रहे है। ऐसा लगता है  कि ये 21वीं सदी का भारत नहीं है, लड़कियां लडक़ों के बराबर होती है, क्या ये सच है ? अगर सच है तो लोग इसे स्वीकार क्यों नहीं करते और कब तक सिर्फ बोलकर ही लड़कियों के बराबरी के दर्जे का दिखावा करते रहेंगे।
सोनीपत के ईशापुर खेड़ी गांव की पंचायत ने लड़कियों के लिए एक ऐसा ही बेतुका फरमान सुना दिया है जिससे साफ तौर पर ये पता चलता है कि समाज के एक बड़े तबके में आज भी लड़कियों के लिए वो सोच नहीं है जो वास्तव में बताई जाती है। पंचायत का तर्क है कि कुछ दिनों पहले गांव की कुछ लड़कियां दूसरे लडक़ों के साथ चली गई थी। इसी के मद्देनजर ये फैसला लिया गया है।
सरपंच का कहना है कि गांव की कोई भी लडक़ी ना तो जींस पहनेगी और अपने पास मोबाइल भी नहीं रखेगी।  सरपंच का कहते है कि गांव में दो बार ऐसा हुआ है कि लड़कियां किसी के साथ चली गई और इससे पंचायत की बदनामी हुई। इसके लिए पंचायत ने मोबाइल को जिम्मेदार माना है। साथ ही लड़कियों के पहनावे को भी पंचायत जिम्मेदार मानती है। पंचायत कहा है कि फैसले को गांव का समर्थन मिल रहा है। गांव के अधिकतर लोग फैसले की सराहना कर रहे हैं।


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