लाखों का चंदा मिलने के बाद भी मरने को मजबूर लाचार गाय, सो रहा है प्रशासन


  Alakh Haryana
  12 Jun 2018

गाय जो न केवल अभी से बल्कि प्राचीन काल से हमारे देश और संस्कृति में पूजनीय है, आज मरने को मजबूर हैं। जी हां, जिले में गौशालाओं को सरकार, सज्जनों और कमेटियों ने लाखों का चंदा दिया, लेकिन इसके बाद भी इनकी हालत में कोई सुधार नहीं नज़र आ रहा। एक बार फिर श्री राम गौसेवा सदन बापौली में एक गाय समेत दो बछडे़ इलाज के दौरान मर गए। इसे लेकर गांव वालों में गुस्सा भरा हुआ है और हो भी क्यों न? आखिर इतना दान और आर्थिक मदद के बाद भी गायों का मरना कुछ समझ से परे है।

पानीपत के बापोली उपमंडल में कई गौशालाएं बनी हुई है जहां गायों के लिए पर्याप्त मात्रा में शैड और दूसरे इंतजाम किया गया है। इसके लिए गांववालों और 4 अन्य गौशालाओं से भी चंदा इकट्ठा किया गया। सरकार ने भी गौशालाओं के डिमांड पर जिला प्रशासन के जरिए संसाधन मुहैया करवाए, लेकिन इसके बाद भी गाय और बछड़े बिना इलाज या इलाज के दौरान मर रहे हैं, जिसने गौशालाओं के कार्य प्रणाली पर सवाल खड़ा कर दिया हैं। आज ही एक ग्रामीण युवक जब गाय को गुड़ खिलाने के लिए गौशाला पहुंचा तो, गाएं कड़कती धूप में खड़ी थी और कुछ बछडे बेसुध पड़े थे, उनकी खोज-खबर लेने के लिए कोई नहीं था। 

युवक ने गांववालों को इसकी सूचना दी, जिसके बाद आजाद हिन्द संस्था के सदस्य गौशाला तो उन्होंने पाया कि इलाज के बिना 3 गाय दम तोड़ चुकी थी। इसके अलावा कई गायें बीमार पड़ी हुई थी, जिन्हें इलाज के लिए गौशाला प्रबंध को कहा गया। 


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