वो जवानी, जवानी नहीं जिसकी कोई कहानी न हो


  डॉ सतीस त्यागी
  02 Feb 2017

जवानी हमेशा से ही चर्चाओं में रही है। मानव सभ्यता के इतिहास में  शायद ही कोई दौर रहा हो जब समाज ने युवाओं पर भरोसा न किया हो। यह स्वाभाविक भी है क्योंकि युवावस्था सर्वाधिक उर्जावान होती है। जो काम जवान आदमी कर सकता है, वह शायद अधेड़ अथवा वृद्ध व्यक्ति न कर सकें। हाँ, अपवादस्वरूप कुछ लोग युवा न होते भी किसी असाधारण काम को अंजाम दे दे लेकिन यह सामान्य स्थिति नहीं है। कहते हैं कि वो जवानी, जवानी नहीं जिसकी कोई कहानी न हो। इस कहन का अर्थ यही है कि कहानी रचने की सामथ्र्य केवल जवानी में ही होती है। दुनिया का इतिहास ऐसे युवाओं के पराक्रम से भरा पड़ा है, जिन्होंने इतिहास की धाराएँ बदली हैं और लगभग असंभव को संभव कर दिखाया है। हम सभी ने इतिहास में सिकंदर, कोलंबस, वास्कोडिगामा अथवा क्लाइव सरीखे अनेक लोगों के विषय में पढ़ा है, जिन्होंने युवावस्था में ही साहसी कारनामों को अंजाम दिया है। क्लाइव जब  ईस्ट इंडिया कम्पनी एक मामूली क्लर्क के रूप में भर्ती होकर हिंदुस्तान आया था तो उसकी उम्र महज़ बीस साल की थी लेकिन कालान्तर में यही फिरंगी नौजवान हिंदुस्तान में अंग्रेजी राज की स्थापना का कारण बना।
   सो, अब विषय पर आयें। तथ्य प्रमाणित करते हैं कि भारत इस समय दुनिया का सबसे युवा देश है क्योंकि यहाँ युवाओं का प्रतिशत विश्व में सबसे ज्यादा है। भारत  की 65 फीसदी आबादी 35 वर्ष की उम्र से कम है। निश्चित ही यह आंकड़ा उत्साहित करने वाला है। जिस देश में इतनी बड़ी संख्या में युवा हों तो वह निश्चित ही अजूबा करने की क्षमता रखता है और ऐसी करोड़ों कहानियाँ पैदा कर सकता है जो हिंदुस्तान को दुनिया का सर्वाधिक खुशहाल देश बना सकतीं हैं। लेकिन, क्या है हिंदुस्तान की असलियत! आज भी हमारे मुल्क की बहुसंख्यक जनता अभावों में जी रही है। करोड़ों लोगों को जिंदगी की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। सच तो यह है कि जिन युवाओं पर कहानियाँ रचने की जिम्मेवारी है, वे खुद निराशा व हताशा के समंदर में डूबे हैं। करोड़ों युवा निठल्ले बैठे हैं। कोई भी सार्थक काम किये बिना वे बुढापे की ओर बढ़ रहे हैं। बेरोजगारी ने उनके स्वाभाविक उत्साह को ठंडा किया हुआ है। जिस देश की जवानी की हालत ऐसी हो, उससे आप क्या अपेक्षा कर सकते हैं। विडंबना यह है कि व्यवस्था के संचालकों के लिए न तो यह कोई चुनौती है और न ही बेरोजगार युवा उनकी प्राथमिकता हैं। फिलवक्त तो इस घोर अँधेरे के खत्म होने की उम्मीद भी नहीं दिखती।


Vidya Softwares

संबंधित खबरें



0 Comments

एक टिप्पणी छोड़ें

 
5234