जींद, 20 अगस्त। बदलती तकनीक के दौर में युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जोड़ने की दिशा में जुलाना में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। युवाओं को AI और आधुनिक डिजिटल तकनीकों का प्रशिक्षण देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में युवाओं को AI की उपयोगिता, रोजगार की बदलती संभावनाओं और तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी गई।
यह प्रशिक्षण शिविर महात्मा गांधी शिक्षा एवं समाज विकास संगठन, जींद की ओर से कोरडाओ वीआईपी अनुसंधान पत्रिका, वेब 3.0 एवं विकेंद्रीकृत प्रणालियां, नीदरलैंड्स के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जुलाना और आसपास के युवाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल से जोड़ना और उन्हें भविष्य की रोजगार चुनौतियों के लिए तैयार करना रहा।
प्रधानमंत्री के AI विजन से जोड़ने की पहल
आयोजकों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों से जोड़ने के आह्वान और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की प्रेरणा से यह प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम को राज्य समाज कल्याण बोर्ड, हरियाणा के चेयरमैन कैप्टन योगेश बैरागी की पहल से भी जोड़ा गया।
शिविर में लैबरफेड के उपाध्यक्ष देवेंद्र पांचाल, जिला रोजगार अधिकारी डॉ. अंजू नरवाल, संस्था अध्यक्ष राजकुमार भोला, मनदीप गुप्ता, राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान जुलाना की प्राचार्या राजेश कुंडु, सार्थक सिंगला सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कैप्टन योगेश बैरागी बोले- AI से डरने की नहीं, सीखने की जरूरत
कार्यक्रम के आयोजक एवं हरियाणा राज्य समाज कल्याण बोर्ड के चेयरमैन कैप्टन योगेश बैरागी ने कहा कि पूरी दुनिया तेजी से तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के युवाओं में प्रतिभा और क्षमता की कोई कमी नहीं है। जरूरत है कि उन्हें सही दिशा, अवसर और आधुनिक तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
कैप्टन योगेश बैरागी ने कहा कि युवा AI जैसी आधुनिक तकनीकों को सीखकर केवल नौकरी हासिल करने तक सीमित न रहें, बल्कि रोजगार देने वाले उद्यमी भी बन सकते हैं।
उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि AI से डरने की नहीं, इसे सीखने और सकारात्मक दिशा में इस्तेमाल करने की जरूरत है। आने वाले समय में वही युवा आगे बढ़ेंगे, जो तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे।
उन्होंने कहा, “हमारा प्रयास है कि जुलाना और जींद क्षेत्र का युवा तकनीक का केवल उपयोगकर्ता न बने, बल्कि तकनीक को समझने वाला, उसका रचनात्मक इस्तेमाल करने वाला और भविष्य की नई संभावनाओं का निर्माण करने वाला युवा बने।”
उन्होंने कहा कि AI का सही और सकारात्मक इस्तेमाल युवाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ स्वरोजगार, उद्यमिता और नवाचार के नए रास्ते खोल सकता है।
युवाओं को बताए AI के व्यावहारिक इस्तेमाल
प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को AI की मूल अवधारणाओं के साथ-साथ इसके व्यावहारिक उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि AI का प्रभाव अब केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय, स्वरोजगार, डिजिटल सेवाओं और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी इसके नए अवसर सामने आ रहे हैं।
AI विशेषज्ञ मनदीप गुप्ता ने युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मूल अवधारणाओं, इसके दैनिक जीवन और कार्यक्षेत्र में उपयोग तथा भविष्य की संभावनाओं से परिचित कराया।
उन्होंने कहा कि आने वाला समय AI आधारित तकनीकों का है। ऐसे में युवाओं को समय की मांग के अनुसार तकनीकी और डिजिटल कौशल हासिल कर खुद को भविष्य के लिए तैयार करना होगा।
राजकुमार भोला बोले- ग्रामीण युवाओं को भी मिले AI की पहुंच
महात्मा गांधी शिक्षा एवं समाज विकास संगठन के अध्यक्ष राजकुमार भोला ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल आधुनिक तकनीक नहीं रह गई है, बल्कि यह शिक्षा, रोजगार, नवाचार, व्यवसाय और सामाजिक विकास को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण शक्ति बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य युवाओं को केवल कंप्यूटर और डिजिटल तकनीक का सामान्य ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें भविष्य के कौशल से जोड़ना और रोजगार के बदलते स्वरूप के लिए तैयार करना है।
राजकुमार भोला ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में तकनीकी रूप से सक्षम युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं को भी AI जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को सीखने और समझने के समान अवसर मिलें।
उन्होंने कहा कि संस्था की ओर से भविष्य में भी युवाओं को आधुनिक तकनीकी और डिजिटल कौशल से जोड़ने के लिए इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।
रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे
प्रशिक्षण शिविर में युवाओं को यह समझाने पर जोर दिया गया कि AI केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल फ्रीलांसिंग, डिजिटल सेवाओं, कंटेंट निर्माण, छोटे व्यवसाय, स्टार्टअप और स्वरोजगार के लिए भी किया जा सकता है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने युवाओं से अपील की कि वे AI को केवल मनोरंजन या सामान्य उपयोग तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने कौशल, पढ़ाई, नौकरी और व्यवसाय को बेहतर बनाने के साधन के रूप में सीखें।
जुलाना में आयोजित यह प्रशिक्षण शिविर क्षेत्र के युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने और उन्हें भविष्य के रोजगार बाजार के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।