पंचकूला/सोनीपत: हरियाणा की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, राई के कुलपति और पूर्व IPS अधिकारी अशोक कुमार अब पद छोड़ेंगे। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में उनकी नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान अशोक कुमार की ओर से अदालत को बताया गया कि वे व्यक्तिगत कारणों से पद पर आगे बने रहने की स्थिति में नहीं हैं और तीन सप्ताह के भीतर इस्तीफा सौंप देंगे।
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ ने उनके बयान को रिकॉर्ड करते हुए याचिका का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इस्तीफा मिलने के बाद उसे एक सप्ताह के भीतर स्वीकार किया जाए। साथ ही कुलपति पद खाली होने की स्थिति में विश्वविद्यालय के वरिष्ठतम डीन को अंतरिम तौर पर कुलपति के कर्तव्यों की जिम्मेदारी देने के निर्देश दिए गए हैं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नए कुलपति की नियुक्ति UGC Regulations, 2018 के अनुरूप की जाए। इस्तीफा स्वीकार करने, अंतरिम व्यवस्था करने और नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने समेत आवश्यक कदम 31 अक्टूबर 2026 तक पूरे करने को कहा गया है।
नियुक्ति को लेकर क्या था विवाद?
अशोक कुमार की नियुक्ति को डॉ. देवेंद्र सिंह मोर और एक अन्य याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में नियुक्ति को अवैध बताते हुए इसे UGC के 2018 के नियमों के विपरीत होने का दावा किया गया था।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह तर्क रखा गया कि कुलपति पद के लिए निर्धारित पात्रता में प्रोफेसर के रूप में 10 वर्ष का अनुभव जैसी शर्तें लागू होती हैं और अशोक कुमार इन शर्तों को पूरा नहीं करते थे। याचिका में उनकी नियुक्ति के साथ-साथ 15 जुलाई 2024 के वेतन निर्धारण संबंधी पत्र को भी चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि यदि राज्य सरकार को विश्वविद्यालय के पहले कुलपति की नियुक्ति का अधिकार था, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करने वाले व्यक्ति को कुलपति नियुक्त किया जा सकता है।
हालांकि, इन आरोपों पर हाईकोर्ट ने नियुक्ति की वैधता को लेकर मेरिट में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया। अशोक कुमार की ओर से पद छोड़ने का बयान दिए जाने के बाद अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया।
वेतन को लेकर भी उठाया गया था सवाल
याचिका में अशोक कुमार के वेतन निर्धारण को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया कि उन्हें कुलपति के निर्धारित वेतनमान के बजाय पूर्व DGP के वेतनमान के आधार पर भुगतान किया जा रहा था।
दूसरी ओर, अशोक कुमार ने इस संबंध में अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उनका वेतन निर्धारित प्रक्रिया और उनके लास्ट पे ड्रॉन के आधार पर तय किया गया था।
अशोक कुमार ने क्या कहा?
मीडिया से बातचीत में अशोक कुमार ने कहा कि कुलपति पद पर उनकी नियुक्ति सरकार ने की थी। उन्होंने यह भी कहा कि नियुक्ति के समय नियमों की जांच संबंधित अधिकारियों का विषय था।
अशोक कुमार के अनुसार, उन्हें विश्वविद्यालय के पूर्व VC एसएस देशवाल के बचे हुए कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि वे अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जिनकी नियुक्ति को UGC नियमों के संदर्भ में सवालों के घेरे में रखा गया है।
अदालत में उनकी ओर से हालांकि यह स्पष्ट किया गया कि वे व्यक्तिगत कारणों से पद पर आगे जारी नहीं रहना चाहते और तीन सप्ताह में इस्तीफा सौंप देंगे।
इस्तीफे के बाद कौन संभालेगा यूनिवर्सिटी?
हाईकोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए हैं। कुलपति का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद विश्वविद्यालय के वरिष्ठतम डीन को अंतरिम तौर पर कुलपति के कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा।
यह व्यवस्था तब तक रहेगी, जब तक नियमित कुलपति की नियुक्ति नहीं हो जाती। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस पूरी प्रक्रिया में विश्वविद्यालय के नियमों और UGC के 2018 नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
मार्च 2024 में संभाला था पद
पूर्व IPS अधिकारी अशोक कुमार नवंबर 2023 में उत्तराखंड के DGP पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके कुछ महीने बाद 1 मार्च 2024 को उन्हें स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा का कुलपति नियुक्त किया गया था।
उनसे पहले पूर्व IPS अधिकारी एसएस देशवाल विश्वविद्यालय के पहले कुलपति बने थे। देशवाल ने भी अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले पद से इस्तीफा दे दिया था।
पहले कपिल देव का नाम आया था
राई, सोनीपत में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा की स्थापना स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा एक्ट, 2022 के तहत हुई थी।
विश्वविद्यालय के शुरुआती दौर में पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान कपिल देव को कुलपति बनाए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन उन्होंने यह जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की। इसके बाद एसएस देशवाल ने कुलपति का पद संभाला।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब प्रक्रिया राज्य सरकार के स्तर पर आगे बढ़ेगी। अशोक कुमार को तीन सप्ताह के भीतर इस्तीफा देना होगा। इस्तीफा मिलने के बाद सरकार को उसे एक सप्ताह में स्वीकार करना होगा।
इसके साथ ही वरिष्ठतम डीन को अंतरिम जिम्मेदारी देने और नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। कोर्ट ने सभी जरूरी कदम 31 अक्टूबर 2026 तक पूरे करने के निर्देश दिए हैं।
यानी फिलहाल अशोक कुमार की नियुक्ति को लेकर चल रहा मामला उनके इस्तीफे के रास्ते समाप्त हुआ है, जबकि नए कुलपति की नियुक्ति अब UGC के 2018 नियमों के अनुरूप प्रक्रिया के तहत होगी।
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