केंद्र सरकार किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ देने और उनकी जानकारी को डिजिटल रूप में संरक्षित करने के लिए फार्मर रजिस्ट्र्री (Farmer Registry) तैयार कर रही है। इस पहल के तहत किसानों को फार्मर आईडी दी जा रही है, जिससे उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ सीधे मिल सकेगा। हालांकि, कई राज्यों ने इस योजना को अपनाने में तेजी दिखाई है, लेकिन पंजाब, हरियाणा और कर्नाटक अब तक इससे दूर बने हुए हैं।
अब तक बन चुकी हैं 4.6 करोड़ फार्मर आईडी
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में जानकारी दी कि डिजिटल कृषि मिशन के तहत अब तक 4.6 करोड़ किसानों को फार्मर आईडी कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इस योजना का लक्ष्य उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित 12 राज्यों में 10.01 करोड़ किसानों को जोड़ना है।
2817 करोड़ रुपये होंगे खर्च
सरकार ने सितंबर 2024 में 2,817 करोड़ रुपये की लागत से डिजिटल कृषि मिशन को मंजूरी दी थी। इस मिशन के तहत एग्रीस्टैक, कृषि निर्णय समर्थन प्रणाली, मृदा उर्वरता मानचित्र और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) तैयार किया जाएगा।
डेटाबेस में होगी ये जानकारी
फार्मर रजिस्ट्र्री के तहत किसानों से जुड़ी तीन मुख्य जानकारी रिकॉर्ड की जाएंगी—
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भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र – उपग्रह और जीआईएस तकनीक से तैयार डिजिटल मानचित्र।
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फसल बोई गई रजिस्ट्र्री – डिजिटल फसल सर्वेक्षण (DCS) के जरिए खेतों और फसलों का सटीक डेटा।
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किसान रजिस्ट्र्री – किसानों की विस्तृत जानकारी जैसे जनसांख्यिकी, भूमि स्वामित्व, फसल उत्पादन, मृदा स्वास्थ्य, पशुधन और मत्स्य संपत्ति।
फार्मर आईडी के फायदे
इस डिजिटल पहचान के जरिए किसान सरकारी योजनाओं, बीमा, ऋण, फसल खरीद, विपणन सुविधाओं और अन्य कृषि सेवाओं का लाभ आसानी से ले सकेंगे। साथ ही, इससे सरकार को किसानों के लिए सही नीतियां बनाने और योजनाओं को सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
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