हरियाणा में पटवारी व्यवस्था में बड़ा बदलाव, स्टेट कैडर लागू करने की तैयारी
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हरियाणा में पटवारी व्यवस्था में बड़ा बदलाव, जिला कैडर की जगह स्टेट कैडर लागू करने की तैयारी
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार प्रदेश की पटवारी व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करने की तैयारी कर रही है। सरकार मौजूदा जिला (डिस्ट्रिक्ट) कैडर प्रणाली को समाप्त कर स्टेट कैडर लागू करने पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव को जल्द होने वाली राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक में रखा जा सकता है।
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से पटवारियों की लंबे समय तक एक ही जिले में तैनाती की समस्या समाप्त होगी। साथ ही प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।
मौजूदा व्यवस्था में क्या है समस्या?
वर्तमान में हरियाणा के पटवारी जिला कैडर के कर्मचारी होते हैं। उनका तबादला सामान्यतः उसी जिले के अलग-अलग सर्किलों में किया जाता है। इसके कारण कई पटवारी वर्षों तक एक ही जिले में कार्यरत रहते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर उनका प्रभाव और नेटवर्क मजबूत हो जाता है।
राजस्व विभाग को लंबे समय से ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में तैनाती रहने से कुछ स्थानों पर भ्रष्टाचार और पक्षपात की शिकायतें बढ़ी हैं।
सरकार क्यों बदलना चाहती है व्यवस्था?
सरकार का मानना है कि मौजूदा प्रणाली में कई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आती हैं।
पटवारियों का दूसरे जिले में तबादला करना संभव नहीं होता।
अधिकांश सेवा अवधि एक ही जिले में गुजर जाती है।
ट्रांसफर होने पर केवल सर्किल बदलता है, जिला वही रहता है।
स्थानीय नेटवर्क मजबूत होने से निष्पक्ष कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं।
रिक्त पदों वाले जिलों में तुरंत कर्मचारियों की तैनाती करना मुश्किल होता है।
स्टेट कैडर लागू होने पर क्या बदलेगा?
यदि स्टेट कैडर प्रणाली लागू होती है तो सरकार आवश्यकता के अनुसार किसी भी जिले में पटवारियों की नियुक्ति और तबादला कर सकेगी।
इससे—
पूरे प्रदेश में जरूरत के अनुसार पटवारियों की तैनाती संभव होगी।
रिक्त पदों को जल्दी भरा जा सकेगा।
प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत होगा।
जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी।
लंबे समय तक एक ही जिले में तैनाती की प्रवृत्ति खत्म होगी।
भूमि रिकॉर्ड और राजस्व सेवाओं में सुधार की उम्मीद है।
सरकार को क्या होगा लाभ?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद सरकार मानव संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेगी। जिन जिलों में पटवारियों की कमी होगी, वहां तत्काल तैनाती संभव होगी। साथ ही भूमि रिकॉर्ड से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता बढ़ने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि, प्रस्ताव पर अंतिम फैसला कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही लागू होगा।
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