रोहतक। शहर के प्रतिष्ठित और लगभग 78 वर्ष पुराने मॉडल स्कूल की आर्थिक स्थिति को लेकर इन दिनों शिक्षकों और शिक्षा जगत में गंभीर चर्चा है। कुछ शिक्षकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने बिना किसी लिखित आदेश के उनके हाउस रेंट अलाउंस (HRA), मेडिकल अलाउंस, वार्षिक वेतन वृद्धि (Increment) और अर्जित अवकाश (EL) जैसी सुविधाओं में कटौती करने का निर्णय लिया है। इस घटनाक्रम के बाद शिक्षकों में असंतोष है और स्कूल के वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
मॉडल स्कूल की स्थापना वर्ष 1952 में मात्र दो विद्यार्थियों के साथ हुई थी। सात दशक से अधिक के सफर में यह संस्थान हरियाणा के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में अपनी अलग पहचान बना चुका है। आज इसकी रोहतक, सांपला, महम और कलानौर में कुल पांच शाखाएं संचालित हैं, जिनमें लगभग 2500 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और करीब 250 शिक्षक कार्यरत हैं। छात्र संख्या के लिहाज से भी यह रोहतक के प्रमुख विद्यालयों में गिना जाता है।
एक समय ऐसा भी था जब मॉडल स्कूल में प्रवेश पाना आसान नहीं माना जाता था। अभिभावकों को अपने बच्चों के दाखिले के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था और यह संस्थान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन तथा उत्कृष्ट परिणामों के कारण प्रदेशभर में प्रतिष्ठा रखता था। इस विद्यालय से पढ़कर अनेक डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, न्यायिक अधिकारी, शिक्षाविद, जनप्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियां देश-विदेश में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
शिक्षकों का दावा—मौखिक रूप से दी गई जानकारी
नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर कुछ शिक्षकों ने बताया कि उन्हें मौखिक रूप से सूचित किया गया कि भविष्य में एचआरए, मेडिकल अलाउंस, इंक्रीमेंट और ईएल जैसी सुविधाएं नहीं दी जाएंगी। उनका दावा है कि अब तक इस संबंध में कोई लिखित आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया है। शिक्षकों का कहना है कि यदि सेवा शर्तों में किसी प्रकार का बदलाव किया जाता है तो उसकी विधिवत लिखित सूचना जारी की जानी चाहिए।
आर्थिक स्थिति पर उठ रहे हैं कई सवाल
इस घटनाक्रम के बाद कई सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं। यदि विद्यालय में लगभग 2500 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, तो आर्थिक संकट की स्थिति क्यों उत्पन्न हुई? विद्यालय की आय-व्यय की वर्तमान स्थिति क्या है? क्या वित्तीय हालात इतने चुनौतीपूर्ण हैं कि कर्मचारियों के भत्तों में कटौती की नौबत आ गई? क्या विद्यालय की वित्तीय स्थिति को लेकर अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के सामने स्पष्ट जानकारी रखी जाएगी? इन सवालों के जवाब का इंतजार है।
पूर्व विद्यार्थियों और शिक्षा जगत में चिंता
कुछ पूर्व विद्यार्थियों का कहना है कि मॉडल स्कूल रोहतक केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि शहर की शैक्षणिक विरासत है। उनका मानना है कि यदि संस्थान आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तो उसके कारणों की पारदर्शी समीक्षा होनी चाहिए और समाधान संवाद तथा सुव्यवस्थित वित्तीय प्रबंधन के माध्यम से निकाला जाना चाहिए।
उठ रहे हैं प्रमुख सवाल
क्या शिक्षकों के भत्तों में कटौती से संबंधित कोई आधिकारिक लिखित आदेश जारी किया गया है?
यदि नहीं, तो मौखिक निर्देशों के आधार पर सेवा शर्तों में बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है?
विद्यालय की वर्तमान आर्थिक स्थिति क्या है?
क्या वित्तीय प्रबंधन की स्वतंत्र समीक्षा या ऑडिट की आवश्यकता है?
क्या विद्यालय प्रबंधन इस पूरे मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करेगा?
प्राचार्या ने क्या कहा?
इस संबंध में जब मॉडल स्कूल की प्राचार्या डॉ. अरुणा तनेजा से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि यह विद्यालय का आंतरिक मामला है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर विस्तृत जानकारी देने की स्थिति में वह नहीं हैं। उन्होंने अधिकृत जानकारी के लिए विद्यालय प्रबंधन समिति के ओएसडी एवं सोसायटी के सचिव श्री राजेश कुमार सहगल अथवा सोसायटी के चेयरमैन से संपर्क करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि वित्तीय परिस्थितियों के कारण विभिन्न संस्थानों में समय-समय पर ऐसे निर्णय लिए जाते रहे हैं।
समाज की धरोहर है मॉडल स्कूल
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मॉडल स्कूल जैसे प्रतिष्ठित संस्थान केवल शिक्षा देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे संस्थानों की आर्थिक और प्रशासनिक मजबूती भविष्य की पीढ़ियों से जुड़ा विषय है। इसलिए आवश्यक है कि इस मामले में उठ रहे सभी सवालों का पारदर्शी ढंग से जवाब दिया जाए, ताकि शिक्षकों, अभिभावकों, विद्यार्थियों और समाज में व्याप्त असमंजस दूर हो सके। alakh haryana webste ke liye bnaaye sug hig ctr ke liye