हरियाणा में शुरू हुआ ‘ड्रोनोथॉन’: यूनिवर्सिटी के युवा खोजेंगे उद्योगों की असली समस्याओं के समाधान
चंडीगढ़, 3 सितंबर। हरियाणा को ड्रोन इनोवेशन, स्वदेशी तकनीक, उन्नत विनिर्माण और युवा उद्यमिता का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने नई पहल शुरू की है। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, स्टार्टअप हरियाणा और ड्रोन टेक मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड ने मिलकर ‘ड्रोनोथॉन – हरियाणा ड्रोन इनोवेशन चैलेंज’ लॉन्च किया है।
इस पहल के तहत विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी, शोधकर्ता, फैकल्टी और युवा इनोवेटर्स उद्योगों की वास्तविक तकनीकी समस्याओं पर काम करेंगे। उद्देश्य ऐसे व्यावहारिक और व्यावसायिक समाधान विकसित करना है, जिन्हें आगे प्रोटोटाइप, फील्ड ट्रायल और बाजार तक पहुंचाया जा सके।
चंडीगढ़ में हुई उच्चस्तरीय बैठक
ड्रोनोथॉन की शुरुआत को लेकर वीरवार को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा निवास में उच्चस्तरीय ड्रोन उद्योग परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने की। इसमें प्रमुख ड्रोन निर्माता कंपनियों, टेक्नोलॉजी कंपनियों, प्रशिक्षण संस्थानों, इनक्यूबेटरों और ड्रोन इकोसिस्टम से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
विश्वविद्यालयों तक पहुंचेगा ड्रोनोथॉन
ड्रोनोथॉन को राज्यभर में पहुंचाने के लिए स्टार्टअप हरियाणा से जुड़े इनक्यूबेटरों की मदद ली जाएगी। ये इनक्यूबेटर विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच सेतु का काम करेंगे। इनके माध्यम से कैंपस आउटरीच, छात्र टीमों की पहचान, मेंटरशिप, चैलेंज, मूल्यांकन और आगे इनक्यूबेशन की प्रक्रिया में सहयोग किया जाएगा।
हरियाणा के विभिन्न विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को इसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। विद्यार्थियों को मल्टीडिसिप्लीनरी टीमें बनाकर वास्तविक औद्योगिक समस्याओं पर समाधान तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
उद्योग देगा समस्या, युवा खोजेंगे समाधान
ड्रोन निर्माता और टेक्नोलॉजी कंपनियां अपनी वास्तविक तकनीकी चुनौतियों के Problem Statements प्रस्तुत करेंगी। इसके बाद विश्वविद्यालयों की टीमें इन समस्याओं पर काम करेंगी। उद्योगों की ओर से टीमों को तकनीकी मार्गदर्शन, डोमेन एक्सपर्टीज और व्यावहारिक इनपुट भी उपलब्ध कराया जाएगा।
चयनित समाधानों को आगे Proof of Concept (PoC), फील्ड ट्रायल, इनक्यूबेशन, इंडस्ट्री मेंटरशिप, निवेश सुविधा और कमर्शियलाइजेशन जैसे अवसरों से जोड़े जाने की संभावना है।
इन क्षेत्रों में होंगे ड्रोन चैलेंज
ड्रोनोथॉन में कृषि छिड़काव, प्रिसिजन एग्रीकल्चर, मैपिंग-सर्वेक्षण, सड़क एवं पुल निरीक्षण, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग, लॉजिस्टिक्स, आपदा प्रबंधन, सार्वजनिक सुरक्षा, AI आधारित ऑटोनॉमस ड्रोन, बैटरी एवं प्रोपल्शन, ड्रोन कम्युनिकेशन, GIS, डेटा एनालिटिक्स, रक्षा एवं रणनीतिक उपयोग, काउंटर-ड्रोन तकनीक, स्वास्थ्य सेवाएं और स्मार्ट सिटी जैसे क्षेत्रों को शामिल किया जा सकता है।
सरकार का लक्ष्य ड्रोनोथॉन को सिर्फ प्रतियोगिता तक सीमित रखने के बजाय नवाचार से स्टार्टअप और विनिर्माण तक की पूरी श्रृंखला विकसित करना है। इससे हरियाणा में स्वदेशी ड्रोन तकनीक, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, रोजगार और नए उद्यमों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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