रोहतक: महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) के पूर्व कुलपति प्रो. राजबीर सिंह के इस्तेमाल में रही विश्वविद्यालय की दो सरकारी गाड़ियों के इस्तेमाल को लेकर आरटीआई से चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। करीब 7 साल की अवधि में दोनों गाड़ियों ने 3.5 लाख किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय की। विश्वविद्यालय की ओर से आरटीआई के तहत दी गई जानकारी में सामने आए वाहन लॉगबुक के रिकॉर्ड को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता जयपाल धनखड़ ने यह जानकारी मांगी थी। उन्होंने गाड़ियों के इस्तेमाल और लॉगबुक में दर्ज यात्राओं में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मामले में विजिलेंस जांच की मांग की है।
7 साल में 3.5 लाख किलोमीटर से ज्यादा चलीं गाड़ियां
MDU के जवाब के मुताबिक, प्रो. राजबीर सिंह ने 7 जनवरी 2019 से 20 फरवरी 2026 तक इन दोनों आधिकारिक वाहनों का इस्तेमाल किया। 7 जनवरी 2019 को उन्हें अस्थायी कुलपति नियुक्त किया गया था और 20 फरवरी 2026 को उनका दूसरा लगातार कार्यकाल समाप्त हुआ।
इस दौरान दोनों सरकारी वाहनों ने मिलकर 3.5 लाख किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय की। इस हिसाब से वाहनों के प्रतिदिन औसतन करीब 135 किलोमीटर चलने का रिकॉर्ड सामने आया है।
प्रो. राजबीर सिंह जनवरी 2019 से फरवरी 2020 तक अस्थायी VC रहे। इस दौरान उनके पास दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स के कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार भी था। इसके बाद उन्होंने 21 फरवरी 2020 से 20 फरवरी 2026 तक MDU के कुलपति के रूप में लगातार दो तीन वर्षीय कार्यकाल पूरे किए।
लॉगबुक में दर्ज यात्राओं की दूरी पर सवाल
जयपाल धांकर ने वाहन लॉगबुक में दर्ज कुछ यात्राओं की दूरी पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई यात्राओं में दर्ज दूरी संबंधित स्थानों के सामान्य राउंड ट्रिप से काफी अधिक दिखाई देती है।
रोहतक-पंचकूला यात्रा
सामान्य तौर पर रोहतक से पंचकूला और वापस की दूरी करीब 456 किलोमीटर है। लेकिन 2 जुलाई 2020 की यात्रा के लिए MDU की वाहन लॉगबुक में 684 किलोमीटर दर्ज किए गए।
वहीं 25 अगस्त 2020 को इसी रूट की यात्रा के लिए लॉगबुक में 720 किलोमीटर दर्ज हैं।
रोहतक-गुरुग्राम
रोहतक से गुरुग्राम और वापस की सामान्य दूरी करीब 160 किलोमीटर है। लेकिन 3 अप्रैल 2021 की यात्रा में वाहन लॉगबुक में 288 किलोमीटर दर्ज किए गए।
रोहतक-जींद
22 जून 2021 को रोहतक से जींद की यात्रा के लिए लॉगबुक में 243 किलोमीटर दर्ज किए गए। जबकि दोनों शहरों के बीच सामान्य राउंड ट्रिप दूरी करीब 136 किलोमीटर बताई गई है। इस एंट्री में जिंद में स्थानीय यात्रा का भी उल्लेख किया गया है।
रोहतक-नारनौल
इसी तरह रोहतक से नारनौल और वापस की सामान्य दूरी करीब 260 किलोमीटर है, जबकि वाहन लॉगबुक में इस यात्रा के लिए 360 किलोमीटर दर्ज किए गए।
लॉगबुक और आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच की मांग
जयपाल धांकर का कहना है कि वाहन लॉगबुक में दर्ज इन दूरियों की विस्तृत जांच होनी चाहिए। उन्होंने लॉगबुक, यात्रा के रूट और संबंधित आधिकारिक यात्रा रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
उनका आरोप है कि इन रिकॉर्ड में दिखाई दे रही दूरी की विसंगतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और पूरे मामले की जांच जरूरी है।
पूर्व VC बोले- नियमों के मुताबिक हुआ काम
वहीं, एक अंग्रेजी अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, मामले में पूर्व VC प्रो. राजबीर सिंह ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सभी काम नियमों के अनुसार किए गए और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
अब सवाल यह है कि वाहन लॉगबुक में दर्ज इन यात्राओं की अतिरिक्त दूरी किन कारणों से हुई और क्या इसके पीछे स्थानीय यात्रा या अन्य आधिकारिक कारण दर्ज हैं। इसकी स्थिति संबंधित रिकॉर्ड और जांच से ही स्पष्ट हो सकेगी।
प्रदीप देसवाल का आरोप- सरकारी गाड़ियों का निजी काम में हुआ इस्तेमाल
INSO राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप देसवाल ने पूर्व MDU VC प्रो. राजबीर सिंह पर सरकारी गाड़ियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है। Alakh Haryana से बातचीत में देसवाल ने कहा कि कई यात्राओं के उद्देश्य और लॉगबुक में दर्ज किलोमीटर पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने चंडीगढ़ से यमुनानगर और पंजाब की यात्राओं का जिक्र करते हुए इनकी जांच की मांग की।
देसवाल ने आरोप लगाया कि प्रो. राजबीर ने जींद स्थित चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय से जुड़े दौरे में 4,800 रुपये यात्रा भत्ता और 4,500 रुपये मानदेय भी लिया था।
उन्होंने कहा कि पूर्व VC का कार्यकाल कई विवादों में रहा और शिक्षकों के निलंबन से लेकर रजिस्ट्रार व अन्य प्रोफेसरों पर कार्रवाई तक कई मामले चर्चा में रहे। देसवाल ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल का रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए।
