रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU), रोहतक से जुड़े एक मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने वरिष्ठ प्रोफेसर एवं शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष डॉ. भगत सिंह राठी को अंतरिम राहत प्रदान की है। हाईकोर्ट ने सिविल रिट याचिका CWP No.32176 of 2026 में 30 सितंबर 2026 को पारित आदेश के तहत विश्वविद्यालय की 9 जुलाई 2026 की विवादित कार्यकारी परिषद (Executive Council) की कार्यवाही, 10 जुलाई 2026 के निलंबन आदेश तथा फैक्ट फाइंडिंग जांच रिपोर्ट पर याचिका लंबित रहने तक रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ की अदालत ने मामले में हरियाणा सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई के लिए 19 मई 2027 की तारीख निर्धारित की है।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता डॉ. भगत सिंह राठी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वह विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग में वरिष्ठतम प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष हैं।
उन्होंने वर्ष 2013 में CWP No.12869 of 2013 के माध्यम से प्रतिवादी नंबर 8 कुलताज सिंह की Ph.D. डिग्री की वैधता को चुनौती दी थी।
याचिका के अनुसार, हाईकोर्ट ने 23 नवंबर 2023 को विश्वविद्यालय को तीन महीने के भीतर डिग्री की वैधता पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके बाद अवमानना याचिका दायर की गई। दलील के मुताबिक, 4 अप्रैल 2025 को संबंधित Ph.D. डिग्री अवैध घोषित की गई और कुलताज सिंह को प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर पद पर पदावनत किया गया।
₹61,300 जुर्माना राशि को लेकर विवाद
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में बताया कि शारीरिक शिक्षा विभाग की समिति ने 16 जून 2025 को M.D. Physical Education Society गठित करने का प्रस्ताव पारित किया था, जिसे 7 जुलाई 2025 को अनुमोदित किया गया।
याचिकाकर्ता पक्ष के अनुसार, कक्षाओं और विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण गतिविधियों में अनुपस्थिति रोकने के लिए विद्यार्थियों पर ₹50 से ₹100 तक नाममात्र जुर्माना लगाया जाता था।
दलील में कहा गया कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान एकत्रित ₹61,300 की पूरी राशि 27 मई 2026 को विश्वविद्यालय खाते में जमा कराई गई थी।
याचिकाकर्ता ने अदालत में यह भी कहा कि उनके विरुद्ध वित्तीय गबन या दुर्भावना का आरोप नहीं है।
जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के गठन और जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए।
दलील दी गई कि हरियाणा सरकार के 15 मार्च 2022 के निर्देश विभागीय जांच में सेवानिवृत्त कर्मचारी की नियुक्ति को आरोपपत्र प्राप्त कर्मचारी के संदर्भ में देखते हैं, जबकि इस मामले में आरोपपत्र जारी होने से पहले ही सेवानिवृत्त कर्मचारी को फैक्ट फाइंडिंग कमेटी में नियुक्त किया गया।
यह भी कहा गया कि जांच अधिकारी ने शिकायत और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए बिना रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी।
विद्यार्थियों की शिकायत को लेकर भी पक्ष रखा
अदालत में प्रस्तुत दलीलों के अनुसार, शारीरिक शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने 26 जून 2026 को लिखित प्रतिनिधित्व देकर कहा था कि विभाग के किसी विद्यार्थी ने डॉ. राठी के खिलाफ शिकायत नहीं की और न ही उन्होंने विद्यार्थियों को प्रताड़ित किया।
याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी दावा किया कि सोसायटी की पहल से विभागीय गतिविधियों में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ी थी।
हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?
अंतरिम राहत विश्वविद्यालय की 9 जुलाई 2026 की विवादित कार्यकारी परिषद की कार्यवाही पर रोक।
10 जुलाई 2026 के निलंबन आदेश पर रोक।
फैक्ट फाइंडिंग जांच रिपोर्ट पर रोक।
हरियाणा सरकार को अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले जवाब दाखिल करने का निर्देश।
अगली सुनवाई 19 मई 2027 को।
महत्वपूर्ण: हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश है। मामले के अंतिम गुण-दोष पर अभी निर्णय नहीं हुआ है। विश्वविद्यालय और राज्य सरकार का जवाब तथा आगे की न्यायिक कार्यवाही शेष है।
MDU Professor Dr Bhagat Singh Rathee Suspension Stayed | Punjab Haryana High Court Big Order
MDU Rohtak के प्रोफेसर डॉ. भगत सिंह राठी को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से राहत। 10 जुलाई के सस्पेंशन आदेश, फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट और EC प्रस्ताव पर रोक। अगली सुनवाई 19 मई 2027।
#MDU #RohtakNews #HighCourt #BhagatSinghRathee #HaryanaNews #MDURohtak #AlakhHaryana #BreakingNews
MDU Rohtak, Dr Bhagat Singh Rathee, Punjab Haryana High Court, MDU Professor Suspension, Maharshi Dayanand University, Rohtak News, Haryana News, High Court Order 2026, Dr Kultaj Singh, Alakh Haryana
स्रोत: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का CWP No.32176 of 2026 में 30 सितंबर 2026 का अंतरिम आदेश। CWP-32176-2026-Interim-Order-30-09-2026.pdf
ब्यूरो रिपोर्ट | ALAKH HARYANA
www.alakhharyana.com
