• Fri. Sep 11th, 2026

Haryana : गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों और प्ले स्कूलों पर शिक्षा विभाग कसेगा शिकंजा ,दो दिन में होगी सूची तैयार

हरियाणा। हरियाणा में अब गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों और प्ले स्कूलों पर शिक्षा विभाग शिकंजा कसेगा।इसको लेकर मंगलवार को डीईओ ने सभी बीईओ की विशेष बैठक बुलाकर बीईओ को गैर मान्यता व अस्थायी मान्यता वाले निजी स्कूलों की सूची दो दिन के अंदर सार्वजनिक किए जाने के सख्त निर्देश दिए।

बैठक में डीईओ नरेश महता ने कहा कि जिले के सभी खंड भिवानी, तोशाम, लोहारू, बहल, सिवानी, बवानीखेड़ा, कैरू के अधीन चल रहे सभी गैर मान्यता व अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की सूची को सार्वजनिक करें। इसके लिए अखबारों में भी ये सूची प्रकाशित कराई जाएं। वहीं खंड स्तर के बाद जिला स्तर पर सभी सात खंडों की एक सामूहिक सूची तैयार होगी, जिसे डीईओ इसी सप्ताह सार्वजनिक करेंगे।

दरअसल, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की जनहित याचिका में हरियाणा सरकार की तरफ से शपथ पत्र दिए जाने के बाद से ही गैर मान्यता व अस्थायी मान्यता वाले स्कूलों के अस्तित्व पर संकट छा गया है। ऐसे स्कूलों में अब एक अप्रैल से बच्चों के दाखिला पर भी सख्त मनाही है। वहीं नए शिक्षा सत्र 2024-25 में अगर इन स्कूलों के अंदर बच्चों के दाखिला अभिभावक कराते हैं तो वे इसके लिए खुद जिम्मेदार होंगे। अभिभावकों को आगाह करने के लिए भी इन स्कूलों का सार्वजनिक किया जाना बेहद जरूरी हो गया है।

रिहायशी कॉलोनियों में धड़ल्ले से चल रहे प्ले स्कूल
गैर मान्यता और अस्थायी मान्यता वाले स्कूलों पर शिक्षा विभाग का शिकंजा कस रहा है तो वहीं प्ले स्कूलों की भी बाढ़ सी आ गई है। रिहायशी मकानों और इलाकों में प्ले स्कूल खुल गए हैं, जिनके संबंध में मान्यता व छोटे बच्चों की सुरक्षा के मानक भी दांव पर लगे हैं। प्ले स्कूल खोलने से पहले महिला एवं बाल विकास विभाग से अनुमति अनिवार्य है और इसके लिए जिला दमकल विभाग से भी फायर एनओसी जरूरी की गई है। इसी तरह छोटे बच्चों के साथ अगर कोई हादसा होता है तो इस परिस्थिति में जिला प्रशासन व संबंधित विभाग भी जिम्मेदार होता है।

हरियाणा प्राइवेट स्कूल संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष घनश्याम शर्मा ने बताया कि हमारे पास बच्चों के दाखिला न करने संबंधी शिक्षा विभाग के कोई आदेश नहीं मिले हैं। अगर विभाग जबरन स्कूलों को बंद कराता है तो इसके खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे और धरातल पर भी अपने स्कूलों का अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ेंगे। सरकार सरासर गलत कर रही है। एक तरफ तो सरकार बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने का दावा कर रही है और दूसरी तरफ शिक्षा के मंदिरों पर ताला जड़ने का तुगलकी फरमान सुना हजारों परिवारों से रोजगार और बच्चों को सड़क पर लाने का काम कर रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *