📍 स्थान: जींद | “कभी खाने का वक़्त नहीं मिला, कभी नींद पूरी नहीं हुई… लेकिन सपना था बड़ा।”
जींद की यशिका गोयल और सरोज देवी—दो साधारण घरों की ये असाधारण बेटियाँ—आज पूरे हरियाणा की प्रेरणा बन चुकी हैं। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (HBSE) द्वारा जारी 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों में यशिका ने प्रदेश में दूसरा और सरोज ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है।
पर इन अंकों के पीछे छुपी कहानी सिर्फ किताबों की नहीं, संघर्ष, त्याग और आत्मबल की है।
👩🎓 यशिका गोयल: किताबों की दुनिया में डूबी, चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का सपना
नरवाना के एसडी कन्या महाविद्यालय की छात्रा यशिका गोयल ने 495 अंक प्राप्त कर प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया। उनके अंक इस प्रकार रहे:
-
अकाउंट और बिजनेस स्टडीज़: 100-100
-
इकोनॉमिक्स: 98
-
मैथ: 99
-
इंग्लिश: 98
-
हिंदी: 86
सुबह 4 बजे उठकर पढ़ाई शुरू करना और रात 12 बजे तक जागकर मेहनत करना यशिका का दिनचर्या थी। पढ़ाई के प्रति ऐसा समर्पण कि कभी-कभी खाना भी भूल जाती थी। उनकी माँ सुनीता बताती हैं, “अगर हम नहीं कहें, तो वह खाना भी छोड़ देती थी।”
यशिका के पिता सूरज गोयल नरवाना में एक इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाते हैं। बेटी की लगन को देखकर उन्होंने कभी संसाधनों की कमी महसूस नहीं होने दी। यशिका अब CA की तैयारी में जुटी हैं—जो सितंबर में होने वाली परीक्षा का सपना लिए हर रोज़ 10–12 घंटे मेहनत कर रही हैं।
“ताऊ का लड़का सीए है। उसी ने प्रेरित किया। अब मैं भी उसकी तरह बनना चाहती हूं।” — यशिका
👧 सरोज देवी: रेहड़ी वाले की बेटी, जिसके सपनों में उड़ान है IAS बनने की
नगूरां गांव की सरोज देवी, जींद के डीएन मॉडल स्कूल की छात्रा हैं, जिन्होंने 494 अंक लेकर प्रदेश में तीसरी रैंक हासिल की।
उनके विषयों में अंक:
-
अंग्रेज़ी: 99
-
हिंदी: 96
-
ज्योग्राफी और इकोनॉमिक्स: 100-100
-
पॉलिटिकल साइंस: 99
-
मैथ: 94
सरोज के पिता परमजीत शहर में फल की रेहड़ी लगाते हैं और पिछले तीन वर्षों से कैंसर से पीड़ित हैं। मां सुदेश एक गृहिणी हैं। सरोज तीन बहनों और एक भाई में सबसे बड़ी हैं—घर की जिम्मेदारियों की डोर अब उनके ही हाथ में है।
“मेरे पापा डॉक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन इलाज के खर्चों के कारण वो सपना अधूरा रह गया। अब मैं IAS बनकर उनका सपना पूरा करना चाहती हूं।” — सरोज
10वीं में भी तीसरा स्थान पाने वाली सरोज ने कोई ट्यूशन नहीं ली, सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी, और सेल्फ स्टडी के बल पर इतिहास रच दिया।
🕊️ इन बेटियों की कहानी है असली ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’
-
यशिका की मेहनत उस लड़की की कहानी है, जो खुद से वादा करती है कि वह खुद के लिए जिएगी और उड़ान भरेगी।
-
सरोज की जद्दोजहद उस बेटी की गाथा है, जो अपने बीमार पिता के सपनों को अपनी हकीकत बना रही है।
इन दोनों बेटियों ने प्राइवेट कोचिंग की चकाचौंध से दूर, अपने हौसलों की मशाल से रास्ता रोशन किया है।
यह सिर्फ रिजल्ट नहीं, यह उस विश्वास का प्रमाण है कि परिस्थितियाँ चाहे जितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर सपने सच्चे हैं और मेहनत ईमानदार, तो मंज़िल दूर नहीं।