🖋️ Edited By: Alakh Haryana Desk भोपाल: मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने महिला सेक्स वर्कर्स के हित में एक बड़ा और संवेदनशील कदम उठाया है। अब राज्य में किसी ढाबे या होटल में छापेमारी के दौरान अगर कोई महिला वेश्यावृत्ति के आरोप में पकड़ी जाती है, तो उसे न तो गिरफ्तार किया जाएगा और न ही आरोपी बनाया जाएगा। यह फैसला महिला अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
राज्य पुलिस ने यह आदेश सभी जिलों के एसपी और प्रमुख शहरों – भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के पुलिस आयुक्तों को भेजा है। आदेश में कहा गया है कि अब सेक्स वर्क में लिप्त पाई जाने वाली महिलाओं को अपराधी नहीं, बल्कि संभावित पीड़िता के रूप में देखा जाए।
🔍 फैसले के पीछे संवेदनशील सोच
पुलिस की पुरानी कार्यप्रणाली में, छापेमारी के दौरान महिलाओं को आरोपी बना दिया जाता था।
स्पेशल डीजी (महिला सुरक्षा) प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव ने इस रवैये को बदलते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि—
“कई बार ये महिलाएं शोषण की शिकार होती हैं, न कि स्वेच्छा से वेश्यावृत्ति में लिप्त। ऐसे में उन्हें दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं।”
💬 नई गाइडलाइन के अहम बिंदु:
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सेक्स वर्क में पाई जाने वाली महिलाओं के साथ सहानुभूति पूर्ण व्यवहार किया जाए।
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उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा और ना ही उनके खिलाफ केस दर्ज होगा।
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पुलिस टीमों को संवेदनशील प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

🔁 समाज में बदलाव का संकेत
यह निर्णय केवल पुलिस के व्यवहार में बदलाव नहीं है, बल्कि यह समाज में स्त्री गरिमा और मानवाधिकारों की समझ को आगे बढ़ाने वाला कदम है। महिलाओं के प्रति नजरिया बदलने के लिए यह कानून संवेदनशील न्याय की मिसाल पेश करता है।
📌 Alakh Haryana का नजरिया:
मध्य प्रदेश की यह नीति अगर अन्य राज्यों में भी अपनाई जाती है, तो यह देशभर में सेक्स वर्क के प्रति सामाजिक सोच को नया मोड़ दे सकती है। ज़रूरत है कि इस संवेदनशील फैसले को समाज, मीडिया और प्रशासन – तीनों स्तर पर सम्मान के साथ अपनाया जाए। 📍 Tags: महिला अधिकार, सेक्स वर्कर्स, मध्य प्रदेश पुलिस, कानून, समाज सुधार, POCSO, महिला सुरक्षा