जींद | Alakh Haryana Political Desk
जींद की राजनीति में इन दिनों “मिड्ढा” नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। Birender Singh के हरियाणवी अंदाज वाले बयान के बाद अब Krishan Lal Middha भी खुलकर मैदान में आ गए हैं। दोनों नेताओं के बयान और सोशल मीडिया पोस्ट के बाद जींद का सियासी पारा लगातार चढ़ता नजर आ रहा है।
चौधरी बीरेंद्र सिंह ने जींद में एक कार्यक्रम के दौरान मजाकिया लेकिन राजनीतिक अंदाज में कहा — “पहले मन्ने भी मिड्ढा ए कहा करते थे… मेरा तो नाक ठीक-ठाक हो गया…”
इसके बाद उन्होंने पुराने कांग्रेस नेताओं और “मिड्ढा” के साथ खड़े लोगों पर भी तंज कसते हुए कहा — “जो मिड्ढा ते मिल रे से… वे या तो कांग्रेस छोड़ दो ना कांग्रेस हो जाओ…”
बीरेंद्र सिंह का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
“आई बे जीतन आले ते डरण लाग्या के?”
अपने भाषण में बीरेंद्र सिंह ने डॉ. कृष्ण मिड्ढा को लेकर एक पुराना किस्सा भी सुनाया। उन्होंने कहा कि जब मिड्ढा राजनीति में नए-नए आए थे, तब किसी ने उनसे कहा कि “मिड्ढा आपसे डरता है।”
इस पर उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया — “मैं किसी ने पाड़ता नहीं… गाली मैं देता नहीं… फेर भी डरता क्यों है?”
फिर उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा — “आई बे जीतन आले ते डरण लाग्या के?”
सभा में इस लाइन पर जमकर ठहाके लगे।
कृष्ण मिड्ढा ने भी दिया सीधा जवाब
बीरेंद्र सिंह का वीडियो वायरल होने के बाद डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने भी सोशल मीडिया पर पलटवार किया।
उन्होंने लिखा — “आज स्वयं को राजनीति का ठेकेदार समझने वालों के दिल और दिमाग में भी मिड्ढा-मिड्ढा हो रही है…” मिड्ढा ने इसे जींद की जनता का प्यार बताते हुए कहा कि यही समर्थन उन्हें और ज्यादा मेहनत करने की प्रेरणा देता है।
जींद में अब “मिड्ढा पॉलिटिक्स” चर्चा में
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ मजाकिया बयानबाजी नहीं, बल्कि जींद की बदलती राजनीतिक जमीन का संकेत है।
एक तरफ चौधरी बीरेंद्र सिंह अपने पुराने देसी और व्यंग्यात्मक अंदाज में विरोधियों पर निशाना साध रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कृष्ण मिड्ढा सोशल मीडिया और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत दिखाने में जुटे हैं। अब जींद में चर्चा सिर्फ राजनीति की नहीं, बल्कि “मिड्ढा बनाम चौधरी” की हो रही है।
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