जींद रियासत की रानी इंद्रजीत कौर और पुत्रवधू के खिलाफ FIR, जमीन के रिकॉर्ड में हेराफेरी का आरोप; नगर परिषद सचिव और पटवारी भी नामजद
Sub Headline: जींद के ओपोलो रोड स्थित करीब 10 एकड़ जमीन को लेकर विवाद; दिल्ली हाईकोर्ट के वकील अभिमन्यु चौधरी की शिकायत पर केस दर्ज। रानी इंद्रजीत कौर ने आरोपों को नकारते हुए कहा—जमीन हमारी है, तकनीकी गलती के कारण रिकॉर्ड में गड़बड़ी हुई।
जींद, हरियाणा | 9 अक्टूबर 2026
हरियाणा के जींद में जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। जींद रियासत की रानी इंद्रजीत कौर और उनकी पुत्रवधू हरसिमरन कौर समेत नगर परिषद सचिव, पटवारी और एक ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि ओपोलो रोड स्थित जमीन के दस्तावेजों और डिजिटल भू-अभिलेखों में बदलाव कर संपत्ति पर कब्जा करने का प्रयास किया गया। हालांकि, रानी इंद्रजीत कौर ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे तकनीकी गलती बताया है।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली हाईकोर्ट के वकील अभिमन्यु चौधरी की शिकायत के अनुसार, जींद के ओपोलो रोड पर स्थित जमीन उनके परिवार की है। शिकायत में कहा गया है कि उनके दादा बलदेव सिंह ने वर्ष 1965 में 50 कनाल 2 मरला जमीन खरीदी थी। वर्तमान में इस संपत्ति में अभिमन्यु चौधरी, उनकी मां सुधा चौधरी और उनके बड़े भाई अभिजीत सिंह की हिस्सेदारी बताई गई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन के राजस्व रिकॉर्ड और डिजिटल नक्शे में कथित तौर पर बदलाव किए गए। इस मामले में रानी इंद्रजीत कौर, उनकी पुत्रवधू हरसिमरन कौर, नगर परिषद सचिव सुमित दहिया, पटवारी नरेश चहल और सुभाष नामक ठेकेदार को नामजद किया गया है।
खसरा नंबर बदलने और जमीन का रकबा घटाने का आरोप
अभिमन्यु चौधरी के मुताबिक, हरियाणा सरकार की वेबसाइट पर जमीन की प्रॉपर्टी आईडी और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के दौरान कथित अनियमितताएं सामने आईं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि परिवार की जमीन के खसरा नंबर 65/58 की जगह डिजिटल नक्शे में खसरा नंबर 65/13 दर्ज कर दिया गया। इसके अलावा, 50 कनाल 2 मरला के कुल रकबे को रिकॉर्ड में घटाकर 18 कनाल 15 मरला दिखाने और जमीन की लोकेशन बदलने का भी आरोप है।
शिकायतकर्ता ने दूसरे खसरा नंबर 64//26/3/2 के क्षेत्रफल में भी कथित बदलाव का दावा किया है। उनके अनुसार, इस खसरे का रकबा 79 कनाल 19 मरला से बढ़ाकर 115 कनाल 13 मरला दर्ज किया गया।
इन आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित राजस्व रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद ही हो सकेगी।
दो बार सेल डीड कराने की कोशिश का आरोप
शिकायत के मुताबिक, विवादित जमीन से जुड़े दस्तावेज तैयार कर तहसील में दो बार सेल डीड बनवाने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया के जरिए जमीन पर दावा मजबूत करने की कोशिश की गई, हालांकि दोनों प्रयास सफल नहीं हो सके।
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि रिकॉर्ड में बदलाव कैसे और किन परिस्थितियों में हुए।
रानी इंद्रजीत कौर ने क्या कहा?
रानी इंद्रजीत कौर ने जमीन पर धोखाधड़ी और दस्तावेजों से छेड़छाड़ के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि विवाद पास-पास स्थित दो अलग-अलग संपत्तियों के रिकॉर्ड से जुड़ा है। उनके अनुसार, खसरा नंबर 65 शिकायतकर्ता से संबंधित है, जबकि खसरा नंबर 64 उनकी संपत्ति है।
रानी ने बताया कि उन्होंने खसरा नंबर 64 की प्रॉपर्टी आईडी बनवाने के लिए नगर परिषद में आवेदन किया था। उनका दावा है कि सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर रिकॉर्ड तैयार करते समय सिस्टम ने खसरा नंबर 65 की लोकेशन उठा ली, जिसके कारण शिकायतकर्ता की संपत्ति की आईडी उनके नाम दर्ज हो गई।
रानी के मुताबिक, जिला प्रशासन ने बाद में संबंधित आईडी को निरस्त कर दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि जमीन की दोबारा पैमाइश होने तक उसकी मौजूदा स्थिति बनाए रखने के आदेश दिए गए थे।
रानी इंद्रजीत कौर ने स्पष्ट किया कि जमीन हड़पने और दस्तावेजों में जानबूझकर हेराफेरी करने के आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
1763 में हुई थी जींद रियासत की स्थापना
जींद रियासत का इतिहास हरियाणा और पंजाब के क्षेत्रीय इतिहास से जुड़ा है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, इसकी स्थापना वर्ष 1763 में महाराजा गजपत सिंह सिद्धू ने की थी। वे फूलकियां मिसल से संबंधित थे। रियासत का ऐतिहासिक संबंध वर्तमान हरियाणा और पंजाब के क्षेत्रों से रहा है।
अब जींद में जमीन के रिकॉर्ड को लेकर सामने आया यह विवाद राजघराने से जुड़ी संपत्ति और स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था, दोनों को चर्चा में ले आया है।
जांच पर टिकी निगाहें
इस मामले में एक पक्ष ने जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी और संपत्ति पर कब्जे की कोशिश के आरोप लगाए हैं, जबकि रानी इंद्रजीत कौर ने तकनीकी त्रुटि का हवाला देते हुए आरोपों को खारिज किया है।
अब जांच में जमीन के मूल दस्तावेजों, पुराने राजस्व रिकॉर्ड, डिजिटल नक्शों, प्रॉपर्टी आईडी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल अहम होगी। FIR दर्ज होना आरोपों का अंतिम प्रमाण नहीं है; मामले में वास्तविक स्थिति जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
नोट: यह खबर उपलब्ध विवरण और दोनों पक्षों के बयानों पर आधारित है। संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है।
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