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जन्मदिन नहीं, शक्ति प्रदर्शन था: हरियाणा में ‘सुपर सीएम’ खट्टर का दबदबा बरकरार

25 सितंबर से शुरू होगी 'लाडो लक्ष्मी योजना', एक परिवार की तीनों महिलाओं को मिलेगा लाभ – सीएम नायब सैनी ने की घोषणा25 सितंबर से शुरू होगी 'लाडो लक्ष्मी योजना', एक परिवार की तीनों महिलाओं को मिलेगा लाभ – सीएम नायब सैनी ने की घोषणा

अलख हरियाणा ( डॉ अनुज नरवाल रोहतकी ) हरियाणा की राजनीति में इन दिनों एक दिलचस्प विरोधाभास देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अब भले ही नायब सिंह सैनी बैठे हों, लेकिन HARYANA BJP  की राजनीतिक नब्ज अब भी एक नाम पर धड़कती है—मनोहर लाल खट्टर। एक ऐसा नेता, जिसने भले ही मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया हो, पर लोगों के दिलों और संगठन के ढांचे में उनकी पकड़ अब भी पहले जैसी मजबूत दिखाई देती है।

यह बात हाल ही में उनके जन्मदिन पर देखने को मिली। यह कोई सामान्य उत्सव नहीं था, बल्कि पूरे हरियाणा में फैले संगठनात्मक शक्ति और राजनीतिक संदेश का एक सुनियोजित प्रदर्शन था। गांव-गांव, शहर-शहर में रक्तदान शिविर लगे, पौधारोपण हुआ, और कार्यकर्ताओं का जोश देखते ही बनता था। कई इलाकों में तो माहौल ऐसा था, मानो राज्य का संचालन अब भी खट्टर के ही हाथों में हो।

विशेष बात यह रही कि ऐसा व्यापक और प्रभावशाली आयोजन शायद उनके मुख्यमंत्री रहते हुए भी नहीं हुआ था। यह आयोजन केवल शुभकामनाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक स्पष्ट राजनीतिक संकेत था—खासकर उन लोगों के लिए जो यह मान बैठे हैं कि खट्टर की भूमिका अब खत्म हो चुकी है।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह पूरा आयोजन एक ‘पावर शो’ था, जो न केवल कार्यकर्ताओं की निष्ठा को दिखाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि हरियाणा बीजेपी में खट्टर की पकड़ अब भी सबसे मज़बूत है। उनकी दो बार की मुख्यमंत्री पारी, ईमानदार छवि, और आरएसएस से जुड़ाव ने उन्हें एक ऐसा जननेता बना दिया है, जिनका जनाधार आज भी हिलता नहीं दिखाई देता।

दिलचस्प बात यह भी है कि हरियाणा से केंद्र में मौजूद अन्य मंत्री इस स्तर का जनसंपर्क या भावनात्मक जुड़ाव नहीं बना पाए हैं। खट्टर के समर्थकों में आज भी वही ऊर्जा है, वही समर्पण है, जो किसी सशक्त नेतृत्व का प्रमाण होता है। उन्हें अब न तो सरकारी मशीनरी का सहारा है और न ही मुख्यमंत्री की कुर्सी, लेकिन उनका प्रभाव वैसा ही है जैसा एक ‘सुपर सीएम’ का होना चाहिए।

इस सबके बीच यह सवाल भी उठने लगा है—क्या खट्टर सिर्फ एक भावनात्मक नेता बनकर रह जाएंगे या आने वाले समय में कोई निर्णायक भूमिका भी निभाएंगे?

 

मनोहर लाल खट्टर का यह जन्मदिन किसी निजी उत्सव से कहीं ज्यादा एक सार्वजनिक राजनीतिक घटना बन गया। यह एक स्पष्ट संदेश था—कि हरियाणा की राजनीति में असली ताकत कुर्सी में नहीं, विश्वास और संगठन में होती है। और इन दोनों ही मामलों में खट्टर अब भी सबसे आगे हैं।

 

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