संसद में पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर बरसे दीपेंद्र हुड्डा, बोले- जवाबदेही के बिना लोकतंत्र नहीं चल सकता
चंडीगढ़, 29 जुलाई। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं की आवाज सुनने के बजाय उसे दबाने का प्रयास कर रही है और नया विधेयक भी छात्रों की मूल समस्याओं का समाधान करने में सक्षम नहीं है।
दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि जिस परिस्थिति में यह विधेयक लाया गया, उससे स्पष्ट है कि सरकार बढ़ते जनदबाव के बाद हरकत में आई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकार को लगा कि युवाओं का आंदोलन व्यापक रूप ले रहा है, तब जल्दबाजी में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ, नई टास्क फोर्स बनाई गई और नया विधेयक पेश कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पेपर लीक रोकने के लिए गंभीर होती तो कानून में सबसे पहले जवाबदेही तय की जाती। उनके अनुसार, कानून में यह प्रावधान होना चाहिए था कि भविष्य में किसी भी राष्ट्रीय परीक्षा का पेपर लीक होने पर संबंधित शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना होगा।
“देश का एजुकेशन सिस्टम एलिमिनेशन सिस्टम बनता जा रहा है”
लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि देश के छात्र शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था छात्रों पर अत्यधिक मानसिक दबाव डाल रही है और शिक्षा का उद्देश्य सीखने के बजाय केवल प्रतिस्पर्धा और बाहर करने की प्रक्रिया तक सीमित होता जा रहा है।
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
छात्र आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि देशभर ने छात्रों के साथ हुई कथित बर्बरता देखी। उन्होंने सवाल किया कि युवाओं पर AK-47, पैलेट गन, आंसू गैस के गोले और कीलों वाली लाठियों का इस्तेमाल करने के आदेश किस स्तर से दिए गए। उन्होंने महाराष्ट्र की छात्रा रिया अहीर का उदाहरण देते हुए कहा कि आंदोलन में शामिल छात्रों को बाद में भी परेशान किया गया।
“केवल सजा बढ़ाने से नहीं रुकेगा पेपर लीक”
दीपेंद्र हुड्डा ने संशोधन विधेयक की आलोचना करते हुए कहा कि नई कमेटियां बनाना, सजा बढ़ाना और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान जोड़ना पर्याप्त समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में भी कानून मौजूद था, लेकिन उसके बावजूद पेपर लीक की घटनाएं होती रहीं।
उन्होंने दावा किया कि देशभर की फास्ट ट्रैक अदालतों में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामलों की जांच में भी अपेक्षित गति नहीं दिखी और कई मामलों में लंबे समय बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी।
“जेन-जी ने लोकतंत्र में जवाबदेही की मांग की”
दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि हाल के छात्र आंदोलनों ने यह साबित कर दिया है कि देश का युवा जवाबदेही चाहता है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी। प्रदर्शनकारियों के हाथों में पत्थर नहीं, बल्कि संविधान और मोबाइल फोन थे, जिनके माध्यम से उन्होंने रचनात्मक तरीके से अपनी आवाज बुलंद की।
उन्होंने कहा कि युवाओं ने यह संदेश दिया है कि लोकतंत्र में सवाल पूछना देशद्रोह नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है।
“12 साल की सरकार का रिपोर्ट कार्ड है युवाओं का आंदोलन”
अपने संबोधन के अंत में दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में शिक्षा, परीक्षा, रोजगार और संवाद व्यवस्था को लेकर युवाओं में असंतोष बढ़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जवाबदेही से बच रही है, जबकि लोकतंत्र जवाबदेही पर ही आधारित होता है। उनके अनुसार, सड़कों पर उतरी जेन-जी वर्तमान व्यवस्था के प्रति युवाओं की नाराजगी और बदलाव की मांग का स्पष्ट संकेत है।