रोहतक। हरियाणा के रोहतक स्थित पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (PGIMS) में डॉक्टरों ने एक 3 वर्षीय बच्चे की जान बचाने में बड़ी सफलता हासिल की। जांघ की टूटी हड्डी के ऑपरेशन से पहले किए गए एक्स-रे में बच्चे के फेफड़े के पास सांस की नली में करीब 2 सेंटीमीटर लंबा लोहे का पेंच फंसा मिला। इसके बाद बच्चे को तुरंत रोहतक PGI रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने बिना चीरा लगाए एंडोस्कोपी तकनीक से सफल ऑपरेशन कर पेंच बाहर निकाल दिया।
जांघ की हड्डी टूटने के बाद हुआ खुलासा
जानकारी के अनुसार, 13 जुलाई को बच्चा बेड से गिर गया था, जिससे उसकी जांघ की हड्डी टूट गई। पहले उसका इलाज नारनौल के एक निजी अस्पताल में किया गया, जहां प्लास्टर लगाया गया। ऑपरेशन की तैयारी के दौरान किए गए रूटीन एक्स-रे में डॉक्टरों को फेफड़े के निचले हिस्से में लोहे का पेंच दिखाई दिया। इसके बाद बच्चे को रोहतक PGI भेजा गया।
परिजनों को भी नहीं थी जानकारी
बच्चे के परिजनों ने बताया कि उन्हें कभी पता ही नहीं चला कि बच्चे ने पेंच निगल लिया था। बच्चे को न खांसी, न सांस लेने में दिक्कत और न ही किसी तरह के अंदरूनी घाव के लक्षण दिखाई दिए थे।
2 घंटे चला ऑपरेशन, बिना चीरा निकाला पेंच
PGI के ईएनटी विभाग के डॉ. रमन वडेरा ने बताया कि बच्चे का ऑपरेशन रीजिड ब्रोंकोस्कोपी तकनीक से किया गया। जनरल एनेस्थीसिया के तहत गले के रास्ते विशेष दूरबीन डालकर करीब दो घंटे तक चली प्रक्रिया में पेंच को सुरक्षित बाहर निकाला गया। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और बच्चा तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
जरा सी चूक जानलेवा हो सकती थी
डॉक्टरों के अनुसार, पेंच का नुकीला हिस्सा यदि सांस की नली से टकरा जाता या नली कट जाती, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। पेंच सांस की नली को कभी भी ब्लॉक कर सकता था, जिससे बच्चे की जान को खतरा हो सकता था।
2-3 महीने से फंसा था पेंच
डॉक्टरों का अनुमान है कि बच्चे ने करीब दो से तीन महीने पहले खेलते-खेलते पेंच मुंह में डाल लिया होगा। यह सांस की नली के रास्ते फेफड़े के निचले हिस्से में जाकर फंस गया। आमतौर पर ऐसी स्थिति में निमोनिया, लगातार खांसी, बुखार या संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन इस बच्चे में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं मिले।
डॉक्टरों की सलाह
विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की है कि छोटे बच्चों को सिक्के, बैटरी, पेंच, बोल्ट, खिलौनों के छोटे पार्ट्स और अन्य धातु की वस्तुओं से दूर रखें। यदि बच्चा अचानक खांसने लगे, सांस लेने में दिक्कत हो या किसी वस्तु के निगलने की आशंका हो, तो तुरंत अस्पताल पहुंचें।