चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने जमीन से जुड़े कामों को आसान और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चंडीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पेपरलेस रजिस्ट्री प्रणाली के दूसरे चरण का शुभारंभ किया।
नई व्यवस्था के तहत अब जमीन की रजिस्ट्री पूरी होते ही उसका इंतकाल (Mutation) अपने आप सिस्टम में दर्ज हो जाएगा। इससे लोगों को अलग से इंतकाल दर्ज करवाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
जमीन फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक
मुख्यमंत्री ने बताया कि नई डिजिटल व्यवस्था में जमीन की खरीद-बिक्री करने वाले क्रेता और विक्रेता दोनों के लिए आधार आधारित e-KYC अनिवार्य कर दी गई है।
इसके साथ ही पहचान की पुष्टि के लिए बायोमेट्रिक और डिजिटल सिग्नेचर सिस्टम भी लागू किया गया है। इससे फर्जी दस्तावेजों और जमीन से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
24 घंटे से 10 दिन में होगा इंतकाल
नई प्रणाली में बिना खेवट विभाजन वाले मामलों में इंतकाल की प्रक्रिया करीब 24 घंटे के अंदर पूरी हो सकेगी।
वहीं खेवट विभाजन वाले मामलों में अधिकतम 10 दिनों के अंदर इंतकाल मंजूर करने की व्यवस्था की गई है।
पहले चरण के बाद अब दूसरा वर्जन
सरकार ने इस योजना की शुरुआत पहले 29 सितंबर 2025 को कुरुक्षेत्र के लाडवा से की थी। इसके बाद 1 नवंबर 2025 से इसे पूरे हरियाणा में लागू किया गया।
अब दूसरे चरण में सिस्टम को और ज्यादा डिजिटल, सुरक्षित और आम नागरिकों के लिए आसान बनाया गया है।
आम लोगों को मिलेगा फायदा
नई व्यवस्था में आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। नागरिक खुद ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं या फिर डीड राइटर, वकील और सरकारी हेल्प डेस्क की मदद ले सकते हैं।
हरियाणा सरकार का दावा है कि यह कदम प्रदेश की राजस्व व्यवस्था को तेज, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
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