कभी क्रिकेट के मैदान पर था नाम, फिर अपराध की दुनिया में आया
हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वह खेल के मैदान से अपनी पहचान बनाए। कभी एक युवा तेज गेंदबाज के रूप में पंजाब रणजी टीम तक पहुंचा सतपाल उर्फ सत्तू भी इसी सपने के साथ आगे बढ़ा था।
साल 1996 में सतपाल ने पंजाब रणजी टीम के लिए तेज गेंदबाज के तौर पर क्रिकेट खेला। उस समय उसे एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी माना जाता था। लेकिन कुछ सालों बाद उसकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने उसे खेल की दुनिया से निकालकर अपराध की सुर्खियों में ला खड़ा किया।
क्रिकेट से दूरी और अपराध की शुरुआत
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सतपाल उर्फ सत्तू का नाम साल 2001 के बाद आपराधिक मामलों में सामने आने लगा।
धीरे-धीरे उस पर रंगदारी मांगने, धमकी देने, अपहरण और हत्या जैसे गंभीर आरोप लगते गए।कहा जाता है कि वह कारोबारियों और व्यापारियों को निशाना बनाकर उगाही करने वाले नेटवर्क से जुड़ गया था। कई राज्यों की पुलिस के लिए वह लंबे समय से तलाश का विषय बना हुआ था।
छोटा राजन गिरोह से भी जुड़ने का आरोप
जांच एजेंसियों के मुताबिक, सत्तू का नाम मुंबई के कुख्यात गैंग से जुड़े मामलों में भी सामने आया था।
पुलिस का दावा था कि वह संगठित अपराध के नेटवर्क के जरिए अलग-अलग जगहों पर अपनी गतिविधियां चला रहा था।
चर्चित मामलों में आया नामसतपाल उर्फ सत्तू का नाम कई हाई प्रोफाइल मामलों में चर्चा में आया। उस पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह पर हुए हमले के मामले में भी आरोप लगे थे।इसके अलावा चंडीगढ़ और पंजाब के कई मामलों में भी उसका नाम सामने आया।
जेल से बाहर आने के बाद फिर बना चर्चा का विषय
मार्च 2024 में जेल से बाहर आने के बाद पुलिस के अनुसार वह फिर एक हत्या मामले में आरोपी बना।जांच में यह भी सामने आया कि वह अलग-अलग पहचान के सहारे छिपकर रह रहा था।पुलिस के मुताबिक, अस्पताल में इलाज के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर फरार होने के बाद उसकी तलाश तेज कर दी गई थी।
मुजफ्फरनगर में एनकाउंटर और कहानी का अंत
पुलिस के अनुसार, मुजफ्फरनगर में उसकी मौजूदगी की सूचना मिली थी।टीम ने घेराबंदी की तो कथित तौर पर फायरिंग हुई। जवाबी कार्रवाई में सतपाल उर्फ सत्तू घायल हो गया।उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
एक खिलाड़ी से अपराधी बनने तक का सफर छोड़ गया सवाल
सतपाल उर्फ सत्तू की कहानी सिर्फ एक अपराधी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस बदलाव की कहानी भी है जिसमें एक खिलाड़ी, जिसने कभी मैदान पर पहचान बनाई थी, बाद में अपराध की दुनिया में पहुंच गया।एक समय जिस हाथ में क्रिकेट की गेंद थी…
आखिर वही हाथ अपराधों के आरोपों से क्यों घिर गया? यह सवाल उसकी कहानी के साथ हमेशा जुड़ा रहेगा।
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