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हरियाणा में जन्म दोष वाले बच्चों हेतु बड़ी खुशखबरी ,भारत सरकार उठाएगी चिकित्सा, शल्य चिकित्सा और पुनर्वास आवश्कताएँ

चंडीगढ़।हरियाणा में जन्म दोष वाले बच्चों हेतु बड़ी खुशखबरी सामने आयी है। दरअसल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार मार्च महीने को राष्ट्रीय जन्म दोष जागरूकता माह के रूप में मना रही है और 3 मार्च को विश्व जन्म दोष दिवस के रूप में मनाती है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आर.बी.एस.के) के अंतर्गत निवारक उपायों और उपचार विकल्पों की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।

एक सरकारी प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 6 प्रतिशत बच्चे किसी न किसी प्रकार के जन्म दोष के साथ पैदा होते हैं। हरियाणा में भी ऐसे बच्चे हैं जो विभिन्न प्रकार के जन्म दोषों का सामना कर रहे हैं। इन स्थितियों में जन्मजात हृदय दोष, क्लबफुट, कटे होंठ, न्यूरल ट्यूब दोष, जन्मजात बहरापन, समय से पहले रेटिनोपैथी, डाउन सिंड्रोम और कई अन्य शामिल हैं। इसके बावजूद भी यदि इन बच्चों को जीवन की विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने का पर्याप्त अवसर प्रदान किया जाए तो वे अपने परिवारों और समुदायों के लिए अत्यधिक खुशी और प्रेरणा लेकर आते हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि जागरूकता के इस महीने भर चलने वाले उत्सव के दौरान, आर.बी.एस.के कार्यक्रम द्वारा प्रदान की जाने वाली प्रारंभिक जांच, निदान, समय पर रेफरल और हस्तक्षेप/उपचार के महत्व पर प्रकाश डालना महत्वपूर्ण है। एक सक्रिय दृष्टिकोण अपनाते हुए किसी भी बच्चे के जीवन में शुरुआती जन्म दोषों की पहचान कर उसका समाधान किया जा सकता है। समय पर चिकित्सा और सहायता सुनिश्चित की जा सकती है।

उन्होंने बताया कि इस अभियान द्वारा ऐसे बच्चों का अच्छा व सही पालन-पोषण करने के लिए परिवारों को सही जानकारी और संसाधनों के साथ सशक्त बना रहे हैं। जन्म दोष वाले बच्चों के परिणामों में सुधार के लिए शीघ्र पता लगा कर स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और व्यापक समुदाय को शिक्षित करें। आर.बी.एस.के कार्यक्रम के ठोस प्रयासों के माध्यम से हरियाणा के प्रत्येक बच्चे को वह देखभाल और ध्यान मिले जिसके वे हकदार हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा राज्य में आर.बी.एस.के कार्यक्रम के कार्यान्वयन के साथ जन्म दोष वाले बच्चों की सभी चिकित्सा, शल्य चिकित्सा और पुनर्वास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। सर्जिकल हस्तक्षेप के लिए माध्यमिक और तृतीयक स्तर की कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए सभी सिविल अस्पतालों में जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (डी.ई.आई.सी) स्थापित किए गए हैं।

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