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सोनीपत में सिंचाई घोटाले की परतें खुलीं: मिट्टी और पानी की चोरी पर कार्रवाई ठप, कर्मचारी करेंगे भूख हड़ताल

Byalakhharyana@123

Apr 7, 2025
Layers of irrigation scam exposed in Sonipat: Action on theft of soil and water halted, employees will go on hunger strikeLayers of irrigation scam exposed in Sonipat: Action on theft of soil and water halted, employees will go on hunger strike

 सोनीपत | Alakh Haryana सोनीपत जिले में सिंचाई विभाग से जुड़ा एक गंभीर घोटाला सामने आया है, जिसने सरकारी तंत्र की निष्क्रियता और भ्रष्टाचार की जड़ों को उजागर कर दिया है। नहर की पटरी से लाखों रुपये की मिट्टी अवैध रूप से उठाई गई और उसी नहर का पानी चोरी कर खेतों में बेचा गया। चौंकाने वाली बात यह है कि महीनों बीतने के बावजूद इस मामले में किसी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब इसी लापरवाही के खिलाफ सिंचाई विभाग के कर्मचारी आंदोलन के मूड में हैं।

15 अप्रैल से भूख हड़ताल और धरना
हरियाणा गवर्नमेंट पीडब्ल्यूडी मैकेनिकल वर्कर यूनियन और सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने ऐलान किया है कि 15 अप्रैल 2025 से दिल्ली जल बोर्ड कार्यालय के बाहर धरना और भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, आंदोलन जारी रहेगा।

कैसे हुआ घोटाले का खुलासा
यूनियन पदाधिकारी सिलक राम मलिक और राजेश धनखड़, जो खुद कैनाल गार्ड हैं, इस घोटाले का भंडाफोड़ करने वाले मुख्य गवाह हैं। उनके अनुसार मल्ला माजरा से नाहरी गांव तक करीब दो एकड़ क्षेत्र की नहर की पटरी से दो फुट गहरी मिट्टी उठाकर बाजार में बेची गई। साथ ही नहर पर अवैध पंप सेट लगाकर पानी खेतों में बेचा गया।

कौन हैं आरोपी?
यूनियन ने आरोप लगाया है कि यह सारा काम JE प्रदीप डांगी की मिलीभगत से किया गया, जबकि स्थानीय जमीन मालिक भीम इसमें मुख्य भूमिका निभा रहा था। यूनियन ने मंडल अभियंता से लेकर प्रमुख अभियंता तक इस संबंध में शिकायतें और वीडियो सबूत सौंपे, लेकिन नतीजा सिफर रहा।

JE की प्रतिक्रिया
JE प्रदीप डांगी ने खुद स्वीकार किया कि मिट्टी और पानी चोरी हुआ है, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें इस मामले की जानकारी बाद में मिली और उसी समय उन्होंने पुलिस को अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दी।

यूनियन की मांगें
यूनियन ने सरकार से तीन मुख्य मांगे रखी हैं:

  1. दोषी अधिकारियों और माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई।

  2. सिंचाई विभाग से भ्रष्टाचार की जड़ें समाप्त की जाएं।

  3. भ्रष्टाचार उजागर करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षा दी जाए।

निष्क्रिय प्रशासन पर सवाल
यूनियन का कहना है कि इस घोटाले का हिस्सा बनने से मना करने पर कर्मचारियों को धमकियां मिल रही हैं। ये संगठित माफिया विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों का खेल खेल रहे हैं। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को राज्यव्यापी स्तर तक ले जाया जाएगा।

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