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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 10 हजार NHM कर्मचारियों को नियमित करने के आदेश

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 10 हजार NHM कर्मचारियों को नियमित करने के आदेश

चंडीगढ़ | पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत लंबे समय से कार्यरत अनुबंधित कर्मचारियों के पक्ष में बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिए हैं कि 10 वर्ष से अधिक समय से लगातार सेवा दे रहे कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए। अदालत ने सरकार को इस पूरी प्रक्रिया को 8 सप्ताह के भीतर पूरा करने का आदेश दिया है।

यह फैसला न्यायमूर्ति संदीप मौदगिल की एकल पीठ ने ‘नीरज रानी और अन्य बनाम हरियाणा राज्य व अन्य’ (CWP-35408-2025) समेत 100 से अधिक याचिकाओं की सुनवाई के दौरान 18 अप्रैल 2026 को सुनाया।

10 साल से अनुबंध पर कर रहे थे काम

याचिकाकर्ता NHM के तहत स्टाफ नर्स, ANM, लैब टेक्नीशियन, ड्राइवर और सैनिटेशन वर्कर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर पिछले 10 से 11 वर्षों से अनुबंध के आधार पर कार्यरत थे। इनकी नियुक्तियां विज्ञापन और चयन प्रक्रिया के बाद मेरिट के आधार पर हुई थीं।

इसके बावजूद हर साल केवल अनुबंध बढ़ाया जाता रहा, लेकिन कर्मचारियों को स्थायी नहीं किया गया। इससे हजारों कर्मचारी लंबे समय से अस्थिरता और नौकरी की अनिश्चितता का सामना कर रहे थे।

सरकार की दलीलें कोर्ट ने ठुकराईं

हरियाणा सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि NHM केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजना है, जो 60:40 फंडिंग पैटर्न पर चलती है। सरकार ने कहा कि यह परियोजना आधारित अस्थायी व्यवस्था है, इसलिए कर्मचारियों को नियमित करना कानूनी रूप से जरूरी नहीं है।

सरकार ने यह भी कहा कि कर्मचारियों को नियमित करने से राज्य के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।

हालांकि हाईकोर्ट ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता संविधान के तहत राज्य सूची का विषय है और योजना का प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह राज्य सरकार के हाथ में है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

न्यायाधीश संदीप मौदगिल ने अपने फैसले में कहा कि एक कल्याणकारी राज्य अपने कर्मचारियों को वर्षों तक असुरक्षा और अनिश्चितता में नहीं रख सकता। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “राज्य कोई बाजार का व्यापारी नहीं है”, जो केवल जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों का इस्तेमाल करे और बाद में उन्हें अस्थायी स्थिति में छोड़ दे।

कोर्ट ने माना कि इतने लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले कर्मचारियों को नियमित करना उनके संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा के लिए जरूरी है।

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