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बीजेपी क्यों करती है परिवारवाद पर ड्रामा ?

बीजेपी दूसरी पार्टियों पर खासकर कांग्रेस पर परिवारवाद को लेकर अक्सर हमला करती है। लेकिन क्या आपको पता है कि बीजेपी ने हरियाणा में परिवारवाद को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया है। दूसरों पर इल्जाम लगाकर बीजेपी पाक साफ बनने का नाटक करती है और परिवारवाद के बहाने अपनी सियासत बचाने की कोशिश करती रही है। बीजेपी ने ना सिर्फ अपने नेताओं के लाल को राजनीति में मौका दिया बल्कि बीजेपी तो दूसरे दलों के राजनीतिक परिवारों के पोते और पड़पोतों तक को गोद ले रही है।

बीजेपी के परिवारवाद को बढ़ावा देने वाली भारी भरकम सबूतों से भरी आपको एक रिपोर्ट दिखाते हैं। रिपोर्ट लंबी है और इसमें नाम बहुत है, इसलिए आपको इत्मीनान से इस रिपोर्ट को देखना होगा और समझना होगा कि बीजेपी इस मुद्दे को लेकर जिस तरह की राजनीति अब तक करती आई है सच्चाई कुछ और ही है,सबसे पहले बात जेजेपी की करते हैं, जिसके सहारे हरियाणा में बीजेपी सरकार चला रही है। यह पार्टी ही परिवारवाद की पैदाइश है। चौटाला परिवार से अलग हुए दुष्यंत, दिग्वविज, अजय और नैना चौटाला इस पार्टी के कर्ताधर्ता हैं। परिवारवाद के दम पर राजनीति करने वाले इस पूरे परिवार को आज बीजेपी का आशीर्वाद प्राप्त है।चौधरी देवीलाल परिवार पर बीजेपी पूरी तरह मेहरबान है,,, चौधरी देवीलाल के पड़पोते दुष्यंत चौटाला गठबंधन सरकार में उप मुख्यमंत्री हैं,,, चौधरी देवीलाल के बेटे चौधरी रणजीत चौटाला निर्दलीय विधायक हैं। परिवारवाद से परहेज करने का ड्रामा करने वाली बीजेपी सरकार ने उन्हें मंत्री बनाया है।

और तो और चौधरी देवी लाल के पोते आदित्य देवीलाल को तो बीजेपी ने खुद अपने सिंबल पर डबवाली विधानसभा से 2019 में टिकट भी दिया, चुनाव नहीं जीत पाए तो जिलाध्यक्ष बना दिया।परिवारवाद पर दूसरी पार्टियों पर अटैक करने वाली बीजेपी ने तो राजनीतिक परिवारों के पोतों तक को टिकट देने में देर नहीं लगाई। ताजा उदाहरण पूर्व सीएम चौधरी भजन लाल के पोते भव्य बिश्नोई का है,,, आदमपुर से नए विधायक भव्य बिश्नोई के पिता कुलदीप बिश्नोई सांसद और विधायक रहे हैं, मां रेणुका बिश्नोई भी विधायक रही हैं, सगे ताऊ चंद्रमोहन विधायक रहे हैं,,, दादी जसमा देवी विधायक रही हैं.

मतलब परिवारवाद का विरोध करते करते उन्ही परिवारों को साथ लिया है जो सबसे ज्यादा बीजेपी के टारगेट पर थे, चाहे चौधरी देवीलाल परिवार हो या भजन लाल परिवार, और भी अनके परिवार हैं.हिसार से बीजेपी सांसद बृजेंद्र सिंह के पिता बीरेंद्र सिंह सांसद रहे, मंत्री रहे, विधायक भी रहे,,, मां प्रेमलता सिंह भी विधायक रही हैं.मौजूदा बीजेपी सरकार में मंत्री कमलेश ढांडा कलायत से विधायक हैं और उनके पति नरसिंह ढांडा पूर्व में विधायक रहे हैं.जे जे पी की टिकट पर गुहला चीका से विधायक ईश्वर सिंह को बीजेपी ने कोई पद नहीं दिया लेकिन बेटे को चेयरमैन बना दिया.अंबाला बीजेपी सांसद रतनलाल कटारिया सांसद हैं पत्नी बंतो कटारिया पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष रही हैं,घरौंडा से विधायक हरविंदर कल्याण के पिता पूर्व सरकार में चेयरमैन रहे हैं।

झज्जर बीजेपी के मौजूदा जिलाध्यक्ष विक्रम कादयान को बीजेपी ने एक बार नहीं दो बार विधानसभा की टिकट दी। दोनों बार एमएलए नहीं बन पाए। इनके पिता ओमप्रकाश बेरी पूर्व में विधायक रहे हैं।बीजेपी की टिकट पर 2014 विधानसभा चुनाव में गन्नौर से चुनाव लड़ चुके जितेंद्र मलिक पहले एमपी रहे हैं। इनकी तो पिछली 2-2 पीढ़ियां विधानसभा और लोकसभा पहुंची थीं।पानीपत शहर से बीजेपी विधायक प्रमोद विज भी राजनीतिक परिवार से आते हैं।सुभाष सुधा जो थानेसर से विधायक हैं, पत्नी उमा सुधा कुरूक्षेत्र नगर परिषद की चेयरमैन रही हैं।

राव इंद्रजीत बीजेपी के गुरूग्राम से सांसद हैं, उनके पिता राव वीरेंद्र सिंह हरियाणा के सीएम रहे हैं, सगे भाई विधायक रहे हैं, अब बेटी को राजनीति में बीजेपी के बैनर पर ही लांच करने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन इसे बीजेपी परिवारवाद नहीं मानती।

रामकुमार गौतम जेजेपी के विधायक हैं, पहले गौतम बीजेपी में रहे हैं, गौतम के बेटे रजत गौतम को हरियाणा सरकार के एजी कार्यालय में अहम पद दिया गया है।कृष्ण मिड्ढा बीजेपी के जींद से विधायक हैं, उनके पिता हरिचंद मिड्ढा दो बार जींद से इनेलो के विधायक रहे हैं, लेकिन बीजेपी इसे परिवारवाद नहीं मानती।

कहने को तो गोपाल कांडा हलोपा से सिरसा के विधायक हैं, लेकिन उनका सरकार को सीधा समर्थन है और उनके सगे भाई गोविंद कांडा बीजेपी की टिकट पर ऐलनाबाद उपचुनाव में उतरकर हार झेल चुके हैं। लेकिन बीजेपी की नजर में यह परिवारवाद नहीं है।बीजेपी परिवारवाद को ना सिर्फ बढ़ावा दे रही है बल्कि उसको बढ़ावा देने के लिए अलग अलग फार्मूले भी ईजाद कर रही है।

कुछ दिन पहले जो कार्तिकेय शर्मा राज्यसभा सदस्य बने हैं, वो भी परिवारवाद की पैदाइश हैं। बीजेपी ने इनको कामयाब करने के लिए कितने एफर्ट किये देखिए। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर कार्तिकेय को बीजेपी ने चुनाव लड़ाया। बीजेपी विधायकों के अलावा जेजेपी, इनेलो, निर्दलीय विधायकों का वोट दिलवाया। कसर बाकी रही तो तब के कांग्रेसी विधायक कुलदीप बिश्नोई से भी क्रोस वॉटिंग करवा दी।कार्तिकेय शर्मा के पिता विनोद शर्मा अंबाला से विधायक रहे हैं, केंद्र में मंत्री रहे हैं, कार्तिकेय की मां शक्ति रानी शर्मा जनचेतना पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ कर अंबाला नगर निगम की मेयर बनी हैं। लेकिन बीजेपी के लिए यह परिवारवाद नहीं है।

सोहना से बीजेपी विधायक संजय सिंह के पिता बीजेपी के विधायक रहे, प्रदेश के रेवेन्यू मंत्री भी रहे।फतेहाबाद से बीजेपी विधायक दूड़ा राम पूर्व सीएम भजन लाल के भतीजे हैं।नूंह से बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ चुके जाकिर हुसैन बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, इनके पिता और दादा विधायक सांसद रहे हैं।रामचंद्र बैंदा फरीदाबाद से सांसद रहे हैं, उनकी बेटी ज्योति बैंदा एचपीएससी की मेंबर हैं।

बीजेपी के राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के चचेरे भाई रघु यादव विधायक रहे हैं।इसके अलावा बीजेपी में परिवारवाद का सबसे बड़ा उदहारण बीजेपी युवा मोर्चा है… जिस मोर्चा में पार्टी के सामान्य कार्यकर्ताओं का बोलबाला होना चाहिए था, उसमें भी बड़े नेताओं के बेटों की ही पैठ है।

बीजेपी परिवारवाद के मुद्दे को लेकर जिस तरह दूसरी पार्टियों पर लांछन लगाती है, जबकि खुद राजनीतिक परिवारों की सेवा में जुटी हुई है। बीजेपी के मूल कार्यकर्ता बेचारे… हमेशा दूसरे दलों और राजनीतिक परिवारों से आए राजकुमारों की दरी बिछाने में लगे रहते हैं।

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